Aastha Special Trains
Aastha Special Trains अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या (Ayodhya) में 22 जनवरी (22nd January) को रामलला (Ramlalla) की प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) के बाद देशभर के श्रद्धालुओं (devotees) को भगवान के दर्शन कराने के लिए रेलवे ने 6 फरवरी से 11 मार्च तक आस्था स्पेशल ट्रेनें (Aastha Special Trains) चलाई थीं। 35 दिनों तक चला यह अभियान अब पूरा हो गया है। महाराष्ट्र से सर्वाधिक 37 ट्रेनें आईं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 8 ट्रेनें अयोध्या पहुंचीं। इन ट्रेनों से 4,04,117 श्रद्धालु रामनगरी आए । देश के 24 राज्यों से आए श्रद्धालुओं रामलला का दर्शन किया। इस दौरान सबसे ज्यादा व्यस्त अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन रहा, जहां अलग-अलग राज्यों से 84 ट्रेनें पहुंची। साथ ही बसों से भी श्रद्धालुओं का अयोध्या आना हुआ।
6 फरवरी से 11 मार्च तक चले अभियान के दौरान अयोध्या शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। कि दो पहिया समेत अन्य वाहन टेढ़ी बाजार से आगे नहीं जा सकते थे। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यातायात नियंत्रित करना पुलिस प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा। ट्रेनों के ठहराव के लिए अयोध्या में पांच रेलवे स्टेशनों का निर्धारण किया गया था।
रेलवे अफसर ने एकीकृत सिस्टम बनाकर दौड़ाई आस्था स्पेशल
आस्था स्पेशल को लेकर रेलवे ने बड़ा सेटअप तैयार करने की जिम्मा वर्ष 2016 बैच के भारतीय रेल (आइआरसीटीसी) अधिकारी सिद्धार्थ वर्मा को सौंपी थी। सिद्धार्थ ने देशभर से सभी जोनल से क्षेत्रीय भाषाओं के कर्मचारी और अधिकारी मांगे। आस्था कमांड सेंटर में इन 100 कर्मचारियों की 15-15 दिन की ड्यूटी लगाई गई। सेंटर के लिए चार डिजिट का हेल्पलाइन नंबर सिद्धार्थ ने बनवाया। सेंटर को बहुभाषायी सहयोग के लिए चार भागों में विभाजित किया। उत्तर जोन में हिंदी व पंजाबी, पूर्वी जोन में आसामी, उड़िया, बंगाली, पश्चिमी जोन में मराठी व गुजराती और साउथ जोन में तेलगू, तमिल, मलयालम, कन्नड़ भाषा जानने वाले कर्मचारी तैनात किए गए। इस अविस्मरणीय यात्रा का जिक्र मंगलवार को रेलवे की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी किया । सिद्धार्थ वर्मा ने आईआरसीटीसी और ट्रेन रनिंग सिस्टम को जोड़कर साफ्टवेयर बनाया। पहली बार बने आईपी आधारित साफ्टवेयर से आस्था कंट्रोल सेंटर में फोन करते ही यात्री की ट्रेन, लोकेशन, सीट नंबर, उसका नाम, पता, उम्र जैसी जानकारी तुरंत सामने आने लगी। देश के सभी डिविजनल कंट्रोल रूम को मिलाकर वाट्सएप ग्रुप बनाया गया। किसी यात्री को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होने पर कंट्रोल रूम के अलावा उस स्टेशन के पास की रेलवे हेल्थ यूनिटों के डाक्टरों की लिस्ट बनायी गई। इस साफ्टवेयर के जरिए श्रद्धालुओं को उनकी ट्रेन के ठहराव, उनके भोजन और सफाई जैसी जानकारी भी उपलब्ध करायी गई।
Editorial

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