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अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण पीएम मोदी ने दी डीआरडीओ वैज्ञानिकों को बधाई
By EditorialPublished on
देश के वैज्ञानिकों (scientists) को सोमवार को बड़ी सफलता मिली है। एमआईआरवी तकनीक साथ अग्नि-5 मिसाइल ( Agni-5 missile) का परीक्षण सफल रहा है। इसके लिए पीएम मोदी ने भी डीआरडीओ (DRDO) के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने 'एक्स' पर लिखा, 'मिशन दिव्यास्त्र' (Mission Divyastra) के लिए हमारे डीआरडीओ वैज्ञानिकों पर गर्व है। यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक (एमआईआरबी) के साथ स्वदेशी रूप से विकसित अग्नि 5 मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण है। एमआईआरवी तकनीक के तहत किसी मिसाइ

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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के वैज्ञानिकों (scientists) को सोमवार को बड़ी सफलता मिली है। एमआईआरवी तकनीक साथ अग्नि-5 मिसाइल ( Agni-5 missile) का परीक्षण सफल रहा है। इसके लिए पीएम मोदी ने भी डीआरडीओ (DRDO) के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने 'एक्स' पर लिखा, 'मिशन दिव्यास्त्र' (Mission Divyastra) के लिए हमारे डीआरडीओ वैज्ञानिकों पर गर्व है। यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक (एमआईआरबी) के साथ स्वदेशी रूप से विकसित अग्नि 5 मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण है। एमआईआरवी तकनीक के तहत किसी मिसाइल में एक ही बार में कई परमाणु हथियार ले जाने को क्षमता होतो है और इन हथियारों से अलग- अलग लक्ष्यों को भेदा जा सकता है। इसकी एक अन्य विशेषता यह है कि इसे सड़क के माध्यम से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इससे पहले को अग्नि मिसाइलों में यह सुविधा नहीं थी। इस प्रोजेक्ट को डायरेक्टर महिला हैं और पूरे प्रोजेक्ट में भी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 'मिशन दिव्यास्त्र' की सक्सेसफुल टेस्टिंग के साथ हो भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास एमआईआरवी को यह अद्भुत्त क्षमता है। इस सिस्टम में स्वदेशी एवियोनिक्स प्रणाली और उच्व सटीकता वाले सेंसर लगे हुए हैं, जिससे यह कन्फर्म होता है कि री-एंट्री व्हीकल सटीकता के साथ टारगेट प्वाइंट्स पर पहुंच जाए। यह बड़ी सफलता मिलने की वजह से भारत की ताकत और बढ़ने वाली है। बता दें कि अग्नि-5 मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी मिसाइल है, जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बनाया है। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 7000 किलोमीटर से अधिक है। यह एक तौन चरणों वाली, रोड-मोबाइल, कनस्तरीकृत, ठोस इंधन चाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इस मिसाइल को पहली बार साल 2007 में योजना बनाई गई थी। अब तक इस मिसाइल के कई सफल परीक्षण हो चुके हैं, लेकिन सोमवार को एमआईआरवी तकनीक के साथ इसका सफल परीक्षण किया गया है, जिससे यह मिसाइल दुश्मन देशों के लिए अब और अधिक घातक हो गई है।

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