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उत्तराखंड ने रचा इतिहास
By EditorialPublished on
उत्तराखंड (Uttarakhand) ने बुधवार को इतिहास रच दिया। विधानसभा में चर्चा के बाद बुधवार को समान नागरिक संहिता का बिल (civil code bill) पास हो गया। दिनभर विधानसभा में बिल को लेकर चर्चा हुई वहीं, इसके बाद सीएम का संबोधन हुआ। बुधवार शाम को यूसीसी बिल ध्वनिमत से पास कर दिया गया। इसके साथ ही उत्तराखंड यूसीसी (Uttarakhand UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अब इस बिल को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। साथ ही आंदोलनकारियों के आरक्षण का बिल भी सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।

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देहरादून (एजेंसी)। उत्तराखंड (Uttarakhand) ने बुधवार को इतिहास रच दिया। विधानसभा में चर्चा के बाद बुधवार को समान नागरिक संहिता का बिल (civil code bill) पास हो गया। दिनभर विधानसभा में बिल को लेकर चर्चा हुई वहीं, इसके बाद सीएम का संबोधन हुआ। बुधवार शाम को यूसीसी बिल ध्वनिमत से पास कर दिया गया। इसके साथ ही उत्तराखंड यूसीसी (Uttarakhand UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अब इस बिल को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। साथ ही आंदोलनकारियों के आरक्षण का बिल भी सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
इसके बाद सीएम धामी (CM Dhami) ने प्रेसवार्ता में कहा कि बुधवार उत्तराखंड के लिए विशेष दिन है। मैं विधानसभा के सभी सदस्यों, जनता का आभार व्यक्त करता हूँ। उनके समर्थन से ही हम आज ये कानून बना पाए हैं। मैं पीएम मोदी (PM Modi) का भी धन्यवाद करना चाहता हूं। ये कानून समानता का है। ये कानून हम किसी के खिलाफ नहीं लाए, बल्कि उन माताओं बहनों का आत्मबल बढ़ाएगा, जो किसी प्रथा, कुरीति की वजह से प्रताड़ित होती थीं। हमने 12 फरवरी 2022 को इसका संकल्प लिया था। इसे जनता के सामने रखा था।
इसे चुनाव के नजरिए से न देखा जाए
सीएम धामी ने कहा कि करीब दो साल में बुधवार को हमने इसे सदन से पास करवाया। देश के अन्य राज्यों से भी हमारी अपेक्षा रहेगी कि वह इस दिशा में आगे बढ़ें। उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव के समय हमारी पार्टी ने संकल्प लिया था, इसे आगामी चुनाव के नजरिये से न देखा जाए।
उत्तराखंड में आंदोलनकारियों का बड़ा योगदान
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों का बड़ा योगदान है। आंदोलनकारियों की सुविधा, पेंशन बढ़ाने से लेकर हमने आरक्षण देने का काम किया है।
जाति, धर्म व पंथ के रीति-रिवाजों से छेड़छाड़ नहीं
विधेयक में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों को ही शामिल किया गया है। इन विषयों, खासतौर पर विवाह प्रक्रिया को लेकर जो प्राविधान बनाए गए हैं उनमें जाति, धर्म अथवा पंथ की परंपराओं और रीति रिवाजों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। वैवाहिक प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। धार्मिक रीति-रिवाज जस के तस रहेंगे। ऐसा भी नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे। खान-पान, पूजा-इबादत, वेशभूषा पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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