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तेज हवाओं और बादलों से जीरे की फसल को नुकसान
By EditorialPublished on
बिगड़े मौसम के मिजाज से जीरा उत्पादक (cumin producer) किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं। पश्चिमी विक्षोभ में परिवर्तन के चलते तेज हवाओं और दो दिनों से बादल छाए रहने से रबी सीजन (rabi season) की मुख्य मसाला फसल जीरा खलिहान में पहुंचने से पहले ही सूखने लगी है। अधिकांश खेतों के 25 फीसदी हिस्से में खड़ी जीरे की फसल सूख गई है। किसानों ने करीब 25 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई है, किसान कहते हैं अगर यही स्थिति कुछ दिन और रही तो खराबे का आंकड़ा बढ़ सकता है। किसानों के अनुसार ज

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जोधपुर (कासं)। बिगड़े मौसम के मिजाज से जीरा उत्पादक (cumin producer) किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं। पश्चिमी विक्षोभ में परिवर्तन के चलते तेज हवाओं और दो दिनों से बादल छाए रहने से रबी सीजन (rabi season) की मुख्य मसाला फसल जीरा खलिहान में पहुंचने से पहले ही सूखने लगी है। अधिकांश खेतों के 25 फीसदी हिस्से में खड़ी जीरे की फसल सूख गई है। किसानों ने करीब 25 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई है, किसान कहते हैं अगर यही स्थिति कुछ दिन और रही तो खराबे का आंकड़ा बढ़ सकता है। किसानों के अनुसार जीरे की फसल अब कटने की अवस्था में है और यह मार्च माह से कटने लगेगी। ऐसे में अचानक तेज हवाएं चलने और बादल छाने से जीरे में ब्लाइट रोग होने लग गया है। तेज हवाओं से जीरे के पौधों पर लगे फूल झड़ रहे है। इससे जीरे की पैदावार घटेगी ओर गुणवत्ता में भी कमी आएगी। किसानों के अनुसार जैसे-जैसे बादल होंगे यह रोग भी बढ़ता जाता है। जिसे जीरे में लाईलाज रोग माना जाता है। वहीं तेज हवाओं से जीरा जल्दी पकने लगता है। इससे दाना कमजोर होता है और जीरे का वजन घट जाता है। मौसम विभाग ने 1 से 3 मार्च तक फिर से बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की सूचना दी है। ऐसे में किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
1 लाख 80 हजार हैक्टेयर में हुई थी जीरे की बुवाई: इस बार रबी सीजन में जीरा की करीब 1 लाख 80 हजार हैक्टेयर में बुवाई हुई है। यहां जीरे का उत्पादन प्रति बीघा में औसत एक से सवा क्विंटल के हिसाब से पैदा होता है। जिससे जिले में 1 लाख 25 हजार टन उत्पादन होना था। मगर फसल खराब के आंकड़े से अगर देखा जाए तो प्रति बीघा में करीब 70 किलो ही जीरा पैदा होगा। जिससे 40 हजार टन का उत्पादन घटने की आशंका है।
फूल ही झड़ गया, जीरे का दाना अधपका सूख रहाः जुड़ के श्रवण भादू ने बताया कि इस बार जीरे में कोई रोग नहीं लगने से बंपर उत्पादन का अनुमान था। लेकिन मौसम की मार ने किसान को रुलाना शुरू कर दिया है। हालत ये है कि फसल कटने में अभी दस से बीस दिन का समय शेष है, लेकिन अचानक बादल छाने एवं हवाओं के जोर से जीरे का फूल ही झड़ने लगा। इससे फसल सूख रही है। दाना भी कमजोर होने लगा। उन्होंने बताया कि 90 बीघा में जीरा बोया जिसमें प्रति बीघा करीब 15 से 20 हजार खर्चा आया, लेकिन मौसम के अचानक बदलाव से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। तेज हवा व बादल आने से दाना पूरा पकने से पहले ही खेत में सूखने लगा है। बादल छाने व हवाएं चलने से 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। समय से पहले ही फसल पकने लगी है और सूखने लगी है। इससे गुणवत्ता भी गिरेगी।
पश्चिमी हवा से हो रहा नुकसान: गोदारों की ढाणी के किसान चैनाराम के 200 बीघा में जीरे की खेती है। ये बताते हैं कि बीते एक सप्ताह से पश्चिमी हवाएं चलने से फसलें जल रही है। इस बार मौसम की मार से खेतों में खड़ी जीरे की फसल में 30 नुकसान हुआ है। किसान बर्बादी के आंसू बहा रहे हैं, लेकिन किसानों के दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है। सबसे ज्यादा जीरे की फसल में नुकसान हुआ है।
पिछले वर्ष के बंपर भाव के कारण हुई ज्यादा बुवाईः भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री तुलछाराम सिंवर ने कहा कि क्षेत्र में जीरे के बाजार भावों को देखते हुए किसानों ने बुवाई 10 से 20 प्रतिशत फसल बुवाई अधिक की थी।

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