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धर्म का विकास हो, इसका प्रयास करना चाहिए
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सोमवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुम्बई (Mumbai) के बाहरी भाग में सह्याद्रि पर्वतमाला पर तेरापंथ (Terapanth) विश्व भारती के प्रकल्प को आध्यात्मिक रूप से स्थापित किया। उन्होंने प्रकल्प के लिए निर्धारित भूमि में प्रथम प्रवचन, आध्यात्मिक गतिविधि के रूप में प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। कठिन रास्ते को पार कर जैसे ही आचार्यश्री कार्यक्रम स्थल पहुँचे तो श्रद्धालुओं ने भावभीना स्वागत किया।

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मुंबई । सोमवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुम्बई (Mumbai) के बाहरी भाग में सह्याद्रि पर्वतमाला पर तेरापंथ (Terapanth) विश्व भारती के प्रकल्प को आध्यात्मिक रूप से स्थापित किया। उन्होंने प्रकल्प के लिए निर्धारित भूमि में प्रथम प्रवचन, आध्यात्मिक गतिविधि के रूप में प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। कठिन रास्ते को पार कर जैसे ही आचार्यश्री कार्यक्रम स्थल पहुँचे तो श्रद्धालुओं ने भावभीना स्वागत किया।
महासभा के अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया, कन्हैयालाल जैन पटावरी, मुम्बई प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष तथा मुम्बई विश्व भारती संयोजक मदनलाल तातेड़ व प्रेक्षा इण्टरनेशनल के अध्यक्ष अरविंद संचेती ने विचार रखे।
इस अवसर पर आचार्य महाश्रमण ने कहा कि धर्म को सर्वोत्कृष्ट मंगल कहा गया है। अहिंसा, संयम और तप रूपी धर्म को परम मंगल धर्म कहा गया है। आदमी के जीवन में धर्म का विकास हो, इसका प्रयास करना चाहिए। धर्म की साधना व्यक्ति और संघ के रूप में होती है। संघ में साधना करने में सुविधा होती है। गुरु के संरक्षण में होने वाली धर्म की आराधना और अधिक बलवती होती है।
उन्होंने निर्धारित समय पर तेरापंथ विश्व भारती की स्थापना की घोषणा कर दी। उन्होंने प्रेक्षाध्यान गीत का आंशिक संगान भी किया। उन्होंने मंगलपाठ सुना आशीष प्रदान किया। साध्वीप्रमुखा, मुख्यमुनि व साध्वीवर्या ने भी शुभकामनाएं दीं। संचालन महासभा के महामंत्री विनोद बैद ने किया।

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