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घर में बड़े-बुजुर्ग है, तो समझो घर में संस्कार - सुरक्षा, मान-मर्यादा है
By EditorialPublished on
संत चन्द्रप्रभ महाराज (Sant Chandraprabh Maharaj) ने कहा है कि हम चाहे तो सोच को सुधार भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं, पर हमें इतना जरूर याद रखना चाहिए कि हम जीवन में जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं।

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Jodhpur जोधपुर (कासं)। संत चन्द्रप्रभ महाराज (Sant Chandraprabh Maharaj) ने कहा है कि हम चाहे तो सोच को सुधार भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं, पर हमें इतना जरूर याद रखना चाहिए कि हम जीवन में जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं। अच्छा सोचेंगे तो अच्छे इंसान बन जाएंगे और बुरा सोचेंगे तो बुरे इंसान बन जाएँगे।
संतप्रवर सोमवार को कायलाना रोड़ (Kaylana road) स्थित संबोधि धाम (Sambodhi Dham) दर्शन करने आए एक स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सोच को बड़ी बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पांव में पड़ी मोच और दिमाग की छोटी सोच हमें कभी भी आगे बढने नहीं देती। उन्होंने कहा कि घर में माता-पिता, बड़े बुजुर्गों और शिक्षकों के प्रति भी हमें हमारी सोच को सम्मानजनक बनानी चाहिए। किस्मत वाले होते है जिनके घर में बड़े- बुजुर्गों का साया होता है। अगर घर में बड़े बुजुर्ग है तो समझो घर में संस्कार और सुरक्षा है, मान और मर्यादा है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में हार और जीत हमारी सोच पर ही निर्भर है, मान लिया तो हार है और ठान लिया तो जीत है।
अभिभावकों ने भी लिया संकल्प
बड़ी सोच के मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि हमें दिमाग में पुरानी निगेटिव बातों नहीं ढोना चाहिए। प्रवचन समारोह में कई दंपतियों ने यह स्वीकार किया की हमारी छोटी सोच के कारण रिश्तों में तनाव आया है, पर उन्होंने संकल्प अपनी सोच को सकारात्मक बनाने व एक-दूसरे की अच्छाइयां देखते हुए जीवन को सुखद बनाने का संकल्प लिया

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