Acharya Mahashraman in Panvel - Pratahkal
मुंबई। मुंबई महानगर में चातुर्मास के साथ 250 से भी अधिक दिनों के प्रवास, विहार के बाद रविवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने अपनी धवल सेना के साथ कामोठे से प्रस्थान कर पनवेल (Panvel) प्रवेश किया। उनका यहाँ मंगल भावना समारोह भी आयोजित था। पनवेल उनके इस बार के मुम्बई विहार-प्रवास का अंतिम पड़ाव निर्धारित था। पनवेलवासी उनके अभिनंदन में जुटे तो पूरा मुम्बई महानगर उन्हें विदाई देने के लिए पहुंच गया। सेवा, उपासना, मार्ग व्यवस्था, प्रवास व्यवस्था आदि कार्यों से जुटे रहने वाले श्रद्धालु आज व्याकुल दिखाई दे रहे थे। आचार्यश्री लगभग छह किलोमीटर का विहार कर पनवेल में स्थित सी.के.टी. कॉलेज पहुँचे।
Acharya Mahashramans auspicious ceremony mumbai news  - Pratahkal
यहाँ अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि आत्मा अध्यात्म जगत का एक महत्त्वपूर्ण शब्द है। परमात्मा, महात्मा, सदात्मा और दुरात्मा। परमात्मा तो जो सिद्ध भगवान मोक्ष में विराजमान हैं, सिद्ध हो चुके हैं, वे परमात्माएं हैं। जो साधु पुरुष होते हैं, चारित्रवान होते हैं, साधु हैं, वे महात्मा हैं। गृहस्थ होते हुए भी भले, अच्छे, ईमानदार, अहिंसा का प्रयास रखने वाले, जीवन में यथासंभव संयम का अभ्यास रखने वाले होते हैं, वे सदात्मा होते हैं। चौथा दुरात्मा वे हैं जो पापों में रस लेते हैं। हिंसा, हत्या, चोरी-डकैती, लूट, चोरी में रत रहने वाले प्राणी दुरात्मा हो जाते हैं। परमात्मा पूजनीय, वंदनीय हैं। संत भी गृहस्थ जीवन को छोड़कर आत्मकल्याण में लगे हुए हैं, वे साधु-महात्मा पूजनीय, वंदनीय, नमस्करणीय हैं। श्रावक और ऐसे सज्जन लोग हैं, मन में अच्छी भावना रखने वाले, नैतिकता और नशामुक्त जीवन जीने वाले सदात्मा हैं। अणुव्रत भी जीवन में अच्छे से आ जाए तो वे भी सदात्मा हो सकते हैं।
उन्होंने अणुव्रत गीत का आंशिक संगान करते हुए कहा कि समाज का कोई भी वर्ग हो, किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाला हो, वो सदात्मा बनने का प्रयास करें। आदमी परमात्मा और महात्मा न भी बन पाए, किन्तु सदात्मा बनने का प्रयास करना चाहिए। दुरात्मा बनने से बचने का प्रयास करना चाहिए।
दिगम्बर आचार्य विद्यासागर महाराज का देहावसान हो गया। वे दिगम्बर आम्नाय के प्रख्यात संत थे। उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना। उनकी आत्मा परमात्म पद पाने की दिशा में गति करे। उनके उत्तरवर्ती धर्म के प्रसार में विकास करें।
Auspicious ceremony organized in Panvel  - Pratahkal
उन्होंने आगे कहा कि हमारा बृहत्तर मुम्बई में अच्छा चातुर्मास, शेषकाल का अच्छा भ्रमण और प्रवास भी हो गया। अब पनवेल आ गए हैं। आगे कोंकण क्षेत्र, पुणे, जालना, खान्देश होते हुए सूरत में अगला चतुर्मास है। बृहत्तर मुम्बई में चातुर्मास, मर्यादा महोत्सव और भ्रमण हो गया। अब मुम्बई से विदाई लेना है। यहां हमारा इतना बड़ा श्रावक समाज है। व्यवस्था समिति के सदस्य, कितने संस्था के लोग जुड़े हुए रहे। श्रावक-श्राविका समाज में खूब अच्छी धार्मिकता बनी रहे, खूब धार्मिक-आध्यात्मिक सेवा करते रहें, मंगलकामना।
साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी उपस्थित जनता को पावन प्रतिबोध प्रदान किया।

Acharya Mahashramans auspicious ceremony volunteers - Pratahkal
स्वागताध्यक्ष राजेन्द्र रांका, जतनलाल मेहता, सी.के.टी. कॉलेज की ओर से अर्चना ठाकुर ने भावनाओं को अभिव्यक्ति दी और पनवेल की ओर से आचार्यश्री को नागरिक अभिनंदन पत्र को समर्पित किया गया। पनवेल ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने प्रस्तुति दी। पनवेल तेरापंथी सभाध्यक्ष बालचंद चोरड़िया की ओर से संयोजक चतरलाल मेहता, सह संयोजक विनोद बाफना, राजेश मेहता, अलका मेहता, युवक परिषद अध्यक्ष विमल बाफना व महिला मण्डल अध्यक्ष भारती बाफना ने विचार रखे। किशोर मण्डल ने प्रस्तुति दी। कन्या मण्डल ने गीत का संगान किया।
मंगल भावना समारोह में मुम्बई प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मदनलाल तातेड़, आचार्यश्री के भाई सूरजकरण दूगड़ व श्रीचंद दूगड़ ने आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।पनवेल व सूरत तेरापंथ समाज ने गीतों का संगान किया। ध्वज हस्तांतरण क्रम में मुम्बई समिति के पदाधिकारियों ने सूरत समिति को ध्वज हस्तांतरित किया।
Editorial

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