India alliance in bihar
पटना (एजेंसी)। बिहार (Bihar) की सियासत का कोण बदलने लगा है। जबसे सत्ता में जेडीयू (JDU) के साथ भाजपा (BJP) आई है। भाजपा के निशाने पर कांग्रेस और उनके नेता राहुल गांधी बन गए है। दिलचस्प यहां यह है कि जिस कांग्रेस को नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी को अपदस्थ करने के लिए जरूरी समझते थे, वही कांग्रेस आज उनके निशाने पर है। जानिए हमले के वे बिंदु जिनके सहारे कांग्रेस को लोकतंत्र का विलेन बताया जाने लगा है।
प्लान 5 फैक्टर:
1. ज्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना
जदयू के महागठबंधन से निकलने के बाद कांग्रेस की दावेदारी ज्यादा लोकसभा सीटों पर होगी। इन सारी सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार को वन टू वन इंडिया गठबंधन से लड़ना पड़ेगा।
2. सवर्ण पर साधा निशाना
कांग्रेस भाजपा के भीतर उदय हुई पिछड़ों की राजनीति को उभार कर अपने पारंपरिक वोट सवर्ण की किलाबंदी करने लगी है। संगठन से लेकर सदन में कांग्रेस सवर्ण की भागीदारी बढ़ाने जा रही है। कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश सिंह को बनाना भी भाजपा के लिए खतरे की घंटी थी । यही वजह भी है कि आरजेडी और कांग्रेस का बढ़ता भूमिहार प्रेम का जवाब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने विजय सिन्हा को डेप्युटी सीएम बनाया।
3. दलित भी कांग्रेस के निशाने पर
बिहार विधान सभा में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को सीएम नीतीश कुमार की ओर से अपमानित करने का मुद्दा भाजपा ने जिस तरह से पांच राज्यों के चुनाव में उठाया और लाभ भी लिया, अब उस मुद्दे को कांग्रेस ने थाम लिया है। यही वजह भी है कि राहुल गांधी ने बिहार में प्रवेश करते ही दलित बस्तियों का विशेष ध्यान रखा। उनसे बात की। उसके साथ बैठे, चाय पी और यह सब करने के पीछे कांग्रेस यह बताना चाह रही है कि आपका पुराना घर कांग्रेस है।
4. मुस्लिम मतों की घेराबंदी
विशेष मकसद है। दरअसल, महागठबंधन सीमांचल से शुरू हुई कांग्रेस की यात्रा के मुस्लिम मतों की पूरी तरह से घेराबंदी करना चाहती है। कांग्रेस अब राजद के प्रभाव के साथ मुस्लिम मतों में बिखराव को रोकने चाहती है। इसलिए बिहार और खासकर सीमांचल से राहुल गांधी की यात्रा इस प्लान की शुरूआत है।
5. ओवैसी फैक्टर
मुस्लिम मतों का एक बड़ा हिस्सा ओवैसी की पार्टी ले जाती है। यह महागठबंधन के लिए टीम कह कर प्रचारित भी करते रही है। राहुल सबसे बड़ा खतरा है।
Editorial

Editorial

Next Story