jain muni
डोंगरगढ़ (एजेंसी)। दिगंबर मुनि (Digambar Muni) परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने शनिवार देर रात 2.35 बजे अपना शरीर त्याग दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ (Chandragiri Tirtha) में आचार्य पद का त्याग करने के साथ 3 दिन का उपवास और मौन धारण कर लिया था। उनके शरीर त्यागने की खबर मिलने के बाद जैन समाज (Jain Samaj) के लोग डोंगरगढ़ में बड़ी संख्या में पहुंचे। पूजन के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मध्यप्रदेश में सरकार के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है।
1946 में कर्नाटक में हुआ जन्म
आचार्य विद्यासागर महाराज (Acharya Vidyasagar Maharaj) का जन्म 10 अक्टूबर 1946 में शरद पूर्णिमा को कर्नाटक के बेलगांव जिले के सद्लगा ग्राम में हुआ था। दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज देश के ऐसे अकेले आचार्य थे, जिन्होंने 505 मुनियों को दीक्षा दी। आचार्य श्री कुन्थु सागर महाराज का नाम दूसरे नंबर पर आता है, उन्होंने अब तक 325 दीक्षा दी हैं। दमोह के कुंडलपुर में चल रहे महोत्सव में आचार्य श्री अब एक साथ 500 से ज्यादा दीक्षा देने जा रहे हैं। वर्तमान में आचार्य श्री का ससंघ देश का सबसे बड़ा संघ है। जिसमें 300 से ज्यादा मुनि श्री और आर्यिका हैं।
गुरू ज्ञान सागर महाराज ने आचार्य पद दिया था :
विद्यासागर महाराज को आचार्य पद की दीक्षा आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को नसीराबाद में दी थी। आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने आचार्य श्री के मार्गदर्शन में ही 1 जून 1973 को समाधि ली थी।
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'मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति'
आचार्य विद्यासागर के समाधि लेने का जिक्र करते हुए भावुक हुए प्र.म. मोदी
नई दिल्ली (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज ने समाधि ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) उनकी समाधि पर भावुक हुए। उन्होंने कहा कि वह पिछले साल के अंत में डोंगरगढ़ में चंद्रगिरि जैन मंदिर की अपनी यात्रा को कभी नहीं भूल सकते हैं। उस समय उन्होंने महाराज जी के साथ समय बिताया था।
'हम सभी शोक में'
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में प्र.म. मोदी ने कहा, नड्डा जी के माध्यम से मैं आप सबका अभिनंदन करता हूं। आज मैं समस्त देशवासियों की तरफ से संत शिरोमणि आचार्य श्री पूज्य विद्यासागर महाराज को श्रद्धा और आदरपूर्वक नमन करते हुए श्रद्धांजलि देता हूं। उनकी समाधि लेने की सूचना मिलने के बाद उनके अनुयायी शोक में हैं। हम सभी शोक में हैं।
उन्होंने कहा, मेरे लिए तो यह एक व्यक्तिगत क्षति जैसा है। वर्षों तक मुझे व्यक्तिगत रूप से अनेक बार उनसे मिलने और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला है। कुछ महीने पहले ही ऐसे मन कर गया तो मैं प्रवास कार्यक्रम को बदलकर उनके पास पहुंच गया था। तब पता नहीं था कि उनसे दोबारा नहीं मिल पाऊंगा। उनके दर्शन नहीं कर पाऊंगा। ये मेरा सौभाग्य रहा है कि पिछले 50 से भी ज्यादा वर्षों से मुझे देश के गणमान्य आध्यात्मिक मूर्तों का आशीर्वाद पाने का अवसर मिला है।
Editorial

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