Voting
नई दिल्ली (एजेंसी)। चुनावों (Election) में मतदाताओं की अंगुलियों पर लगने वाली स्याही को मिटाना अब आसान नहीं होगा। यह अंगुलियों पर लगने के पांच सेकेंड के भीतर ही अमिट छाप छोड़ देगी। इतना ही नहीं, अंगुलियों पर इसे लगाने से पहले अब यह भी देखा जाएगा कि मतदाता ने अपने हाथों में तेल या फिर चिकनाई वाली कोई चीज तो नहीं लगाई है। यदि ऐसा है तो पहले उसकी अंगुलियों को कपड़े से साफ किया जाएगा। फिर उसे लगाया जाएगा। यही वजह है कि चुनाव के दौरान मतदान कर्मियों को दी जाने वाली चुनाव सामग्री की किट में अब हाथों को साफ करने के लिए एक कपड़ा भी मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं
चुनाव आयोग ने यह पहल तब की है, जब चुनाव में गड़बड़ी करने वाले लोग पहचान को छुपाने और फिर से बोट डालने के लिए हाथों में लगने वाली स्याही
(Voting ink)
को तुरंत बाद मिटा देते थे। यह इसलिए भी हो जाता था, क्योंकि उनके हाथों में लगने वाली स्याही को अपनी छाप छोड़ने में थोड़ा वक्त लगता था । चुनाव आयोग ने इस चुनौती को समझा और इससे निपटने के लिए विशेष स्याही बनाने वाली मैसूर (कर्नाटक) की कंपनी से संपर्क साधा। इसके बाद इसमें बदलाव किया गया है। इसके चलते अब यह स्याही दो सेकेंड में ही काम शुरू कर देगी ।
गौरतलब है कि आम चुनाव में विशेष स्याही का इस्तेमाल पहली बार 1962 में किया गया था। इसके बाद तो देश में होने वाले प्रत्येक आम चुनावों में इसका इस्तेमाल होते आ रहा है। अब तो पंचायत सहित दूसरे सभी चुनावों में इस स्याही का इस्तेमाल होता है। खास बात यह है कि इस स्याही को बनाने का फार्मूला नई दिल्ली स्थित सीएसआइआर की नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ने खोजा था। बाद में इसे बड़े स्तर पर तैयार करने का लाइसेंस कर्नाटक
(Karnataka)
स्थित मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (एमपीवीएल) (Mysore Paint and Varnish Limited) को दिया गया, जो देश में इसे बनाने वाली एकमात्र कंपनी है। साथ ही इसका फार्मूला भी इसी कंपनी के पास है।
कई देश उपयोग के लिए भारत से लेते हैं यह स्याही
चुनाव में इस्तेमाल होने वाली इस स्याही की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के 30 देशों में भी चुनाव के दौरान इसका इस्तेमाल होता है। जो इसे बनाने वाली कर्नाटक स्थित एक मात्र कंपनी मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड (एमपीवीएल) से मंगाई जाती है। इनमें प्रमुख रूप से मलेशिया, कनाडा, कंबोडिया, घाना, अफगानिस्तान, आइवरी कोस्ट, तुर्किये, नाइजीरिया, पपुआ न्यूगिनी, नेपाल, सिंगापुर, दुबई, मंगोलिया, दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क आदि देश शामिल हैं।
Editorial

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