Smart City - Pratahkal
नई दिल्ली (एजेंसी)। इस साल स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) पूरा करने में जुटे शहरी कार्य मंत्रालय की योजना में शामिल शहरों में बार-बार सीईओ के तबादलों पर चिंतित केंद्र सरकार ने फिर से राज्यों से कहा है कि वे उनके लिए निश्चित कार्यकाल निर्धारित करें। केंद्र सरकार के अनुसार, स्मार्ट सिटी के एसपीवी यानी स्पेशल परपज बेहिकल के सीईओ का कार्यकाल कम से कम दो साल का होना चाहिए ताकि वे अपना काम ठीक ढंग से कर सकें। इन एसपीवी पर ही शहर स्तर पर योजनाएं बनाने, उनका क्रियान्वयन करने और निगरानी की जिम्मेदारी होती है। इनमें स्थानीय शहरी निकाय और संबंधित राज्य सरकार की आधी आधी हिस्सेदारी होती है।
शहरी कार्य मंत्रालय ने माना है कि स्थानीय परिस्थितियों के कारण सीईओ के बार-बार तबादलों की नौबत आती है, लेकिन यह नहीं होना चाहिए। स्मार्ट सिटी मिशन कई विस्तार के बाद इस साल जून में पूरा होना है, लेकिन अभी भी काफी परियोजनाएं लंबित हैं। मिशन के क्रियान्वयन की चुनौतियों में सीईओ के बार बार तबादलों के मसले को भी शामिल किया गया है। शहरी कार्य मंत्रालय से संबंधित एक संसदीय समिति ने भी इस पर अपनी चिंता जताते हुए मंत्रालय से जवाब जानना चाहा था।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सीईओ का बार-बार स्थानांतरण सही नहीं है। सबसे पिछड़े शहरों में सबसे बड़ा कारण भी यही है कि वहां सीईओ का हर छह महीने या उससे भी कम समय में तबादला हो रहा है। एक तो तबादले जल्दी-जल्दी हो रहे हैं और दूसरे, परियोजनाएं भी बार-बार बदली जा रही हैं। इससे काम प्रभावित होता है। सबसे ज्यादा पिछड़े शहरों में शिमला और धर्मशाला जैसे शहर भी हैं। इन सभी की रैंकिंग 80 से नीचे हैं। मंत्रालय की चिंता यह भी है कि अनेक जगहों पर स्मार्ट सिटी के लिए जिस एसपीवी का गठन हुआ है, उनमें कुछ कागजी एसपीवी हैं। वहां कुछ स्टाफ हैं, लेकिन एसपीवी का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। वे परियोजना के संदर्भ में निर्णय तो ले लेती हैं, लेकिन उसके बाद या तो प्रोजेक्ट नगर निगम को वापस कर दिया जाता है या फिर किसी अन्य संगठन को दे दिया जाता है। इंदौर और अहमदाबाद जैसे जिन शहरों में अच्छा और सक्षम स्टाफ है, इंजीनियरिंग से जुड़े लोग हैं या काम खुद किया जा रहा है वहां काम ठीक हो रहा है। दूसरे संगठनों को काम दे देने से निगरानी नहीं हो पा रही है।
Editorial

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