Supreme Court
नई दिल्ली, 15 फरवरी 2024: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में इलेक्टोरल बॉन्ड (electoral bonds) को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है। यह फैसला याचिकाकर्ताओं की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड चुनावों में पारदर्शिता को कम करते हैं और राजनीतिक दलों को अज्ञात स्रोतों से धन प्राप्त करने की अनुमति देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित किया। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ (Judge D.Y. Chandrachur) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड चुनावों में पारदर्शिता को कम करते हैं और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21
(Article 21)
के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
याचिकाकर्ताओं की दलील:
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड चुनावों में पारदर्शिता को कम करते हैं और राजनीतिक दलों को अज्ञात स्रोतों से धन प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
सरकार की दलील:
केंद्र सरकार ने अपनी दलील में कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड चुनावों में पारदर्शिता लाते हैं और राजनीतिक दलों को धन प्राप्त करने का एक वैध तरीका प्रदान करते हैं। सरकार ने यह भी कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड का इस्तेमाल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड चुनावों में पारदर्शिता को कम करते हैं और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
फैसले का प्रभाव:
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का चुनावों पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह फैसला चुनावों में पारदर्शिता लाने और राजनीतिक दलों को धन प्राप्त करने के तरीके में बदलाव ला सकता है।
Editorial

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