ICAI
मुंबई। अनुशासन में कमजोर रिकॉर्ड को लेकर आलोचना का सामना कर रहे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ICAI (आईसीएआई) ने लापरवाह सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 2007 में वर्तमान तंत्र लागू होने के बाद से अब तक 2,652 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को “प्रथम दृष्टया दोषी” पाया गया है, लेकिन हाल के वर्षों में अधिक सुनवाई और मामलों के निपटारे के चलते कार्रवाई में तेजी आई है।
अप्रैल से अगस्त के बीच पैनल की 71 बैठकों में 200 से अधिक सुनवाई पूरी हुई हैं, जिसमें कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सदस्यता एक महीने से लेकर पांच साल तक के लिए रद्द कर दी गई। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 366 बैठकें हुईं, जो 2022-23 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थीं। इस वर्ष दिए गए दंडों की संख्या पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है, हालांकि इसमें से कई मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण बंद कर दिए गए।
आईसीएआई के एक सूत्र ने बताया कि “जांच के लिए भेजे गए 2,652 मामलों में से 2,284 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है। बोर्ड ऑफ डिसिप्लिन और अनुशासन समिति द्वारा संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया।” इन मामलों में से 1,080 मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को पेशेवर या अन्य दुराचरण का दोषी पाया गया। इनमें से 486 मामले सरकार द्वारा भेजे गए थे, जिनमें से 387 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है और 165 सदस्यों को दोषी ठहराया गया है।
वर्षों से आईसीएआई, जो पेशे को नियंत्रित करता है, अपने अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को लेकर आलोचना का सामना करता रहा है। इसी कारण सरकार ने इसके कुछ अधिकार छीनकर नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) की स्थापना की। इस नई एजेंसी को सूचीबद्ध और बड़े कंपनियों के ऑडिटरों और ऑडिट फर्मों से जुड़े मामलों की जांच का कार्य सौंपा गया, जिससे सीए समुदाय में काफी विरोध हुआ।
हालांकि, आईसीएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संस्था के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कहा कि पहले संस्था अपने सदस्यों के खिलाफ की गई कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं करती थी, जिससे इसकी नकारात्मक छवि बनी।
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