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एचपीसीएल का सिवीड बायोमास से जैव ईंधन के उत्पादन में एक क्रांतिकारी कदम
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मुंबई। एचपीसीएल ने बेंगलुरू में अपना अत्याधुनिक एचपी ग्रीन अनुसंधान एवं विकासकेंद्र स्थापित किया है और पेट्रोलियम रिफाइनिंग, नवीन उत्प्रेरकों एवं योजकों केविकास, जैव ईंधन, वैकल्पिक ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी आदि से संबंधित विभिन्नक्षेत्रों में अनुसंधान कर रहा है तथा विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए पेटेंटप्रौद्योगिकी/उत्पाद भी विकसित किया है।

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मुंबई। एचपीसीएल(HPCL) ने बेंगलुरू में अपना अत्याधुनिक एचपी ग्रीन अनुसंधान एवं विकासकेंद्र स्थापित किया है और पेट्रोलियम रिफाइनिंग, नवीन उत्प्रेरकों एवं योजकों केविकास, जैव ईंधन, वैकल्पिक ऊर्जा, नैनो प्रौद्योगिकी आदि से संबंधित विभिन्नक्षेत्रों में अनुसंधान कर रहा है तथा विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए पेटेंटप्रौद्योगिकी/उत्पाद भी विकसित किया है।
प्रमुख वैश्विक समस्याओं हेतु अभिनव समाधान विकसित करने के लिए सी6 एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2010 मेंकी गई थी जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। पिछलेदशक में, यह सिवीडकी संधारणीय, विस्तृत तौर से तथा मशीनीकृत खेती एवं इसबायोमास को नए उत्पादों में बदलने के लिए अभिनव प्रौद्योगिकियों का अग्रणी बन गयाहै।
जहां तक जैव ईंधन उत्पादन कासवाल है, सिवीडपारंपरिक बायोमास के लिए एक आकर्षक विकल्प प्रदान करता है,क्योंकि यह खाद्य सुरक्षा के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करता है।इसके लिए उर्वरकों यासिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है तथा इसे पारंपरिक कृषि के लिए अनुपयुक्त क्षेत्रोंजैसे समुद्र तट आदि में भी उगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, सिवीडस्थलीयफसलों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं तथा कुछ प्रजातियां कुछ ही दिनों में अपनेबायोमास को दोगुना करने में सक्षम होती हैं। इस प्रकार वे 2070 तक भारत की नेट-ज़ीरोप्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कार्बन कैप्चर हेतु एक उत्कृष्ट विकल्प हैं।
पारस्परिक हित केक्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास सहयोग के लिए एचपीसीएल और सी6 एनर्जीप्राइवेट लिमिटेड ने अपने हितों की समानता को स्वीकार करते हुए, एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) परहस्ताक्षर किए हैं जोविशेष रूप से सिवीडबायोमास के मूल्य संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकियोंके संयुक्त विकास और व्यावसायीकरण पर केंद्रित है।
एचपीसीएल और सी6 एनर्जी के बीच यह सहयोग भारत की खाद्य सुरक्षा कोप्रभावित किए बिना, संधारणीय तरीके से पारंपरिक ईंधन सहित जैव ईंधन को लागत-प्रतिस्पर्धी बनाने केइस दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है। यह रणनीतिक सहयोग भारत सरकारके आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और ऊर्जा सुरक्षा के बड़े उद्देश्यके साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए अत्याधुनिक तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत कीयात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी है।
इस समझौता ज्ञापन के तहत, एचपीसीएल सी6 एनर्जी के साथ मिलकर सीवीडबायोमास को ईंधन और रसायनों में परिवर्तित करने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास और विस्तारकरेगा। जिस अवधि में इन प्रौद्योगिकियों का विकास और परीक्षण किया जा रहा है, सी6 एनर्जीसीवीडकी खेती और पैदावार को और अधिक लागत प्रभावी बनाने के अपस्ट्रीमहिस्सेपर भी काम करेगी।

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