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चांदी हुई एक लाख के पार,लेकिन चमक अभी भी बरकरार !
By EditorialPublished on
मुंबई। इस साल धनतेरस पर देशभर में लोगों ने चांदी की जमकर खरीदारी की है। पिछले साल की तुलना में प्रति किलोग्राम चांदी की कीमत में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। चांदी की कीमत 1 लाख प्रति किलो हो गई है। उसके बाद भी चांदी की मांग 30 से 35 फीसदी तक बढ़ गई है। इसकी वजह सोने की पहुंच से बाहर होती कीमत है।

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मुंबई। इस साल धनतेरस पर देशभर में लोगों ने चांदी(Silver) की जमकर खरीदारी की है। पिछले साल की तुलना में प्रति किलोग्राम चांदी की कीमत में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। चांदी की कीमत 1 लाख प्रति किलो हो गई है। उसके बाद भी चांदी की मांग 30 से 35 फीसदी तक बढ़ गई है। इसकी वजह सोने की पहुंच से बाहर होती कीमत है। इसके अलावा औद्योगिक उपयोग के लिए भी चांदी की मांग बढ़ी है।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, इस साल पहली बार चांदी की इतनी भारी मांग रही। इसकी वजह औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रिक कारों में किया जाता है। इसके अलावा, नागरिकों द्वारा चांदी की खरीदारी भी बढ़ी है क्योंकि उन्हें एहसास हुआ है कि चांदी निवेश के लिए किफायती है।
चांदी की मांग 30 से 35 फीसदी बढ़ी है, जबकि सोने की बिक्री 15 फीसदी घटी है। पिछले साल धनत्रयोदशी पर 42 टन सोना बिका था। इस साल यह घटकर 36 टन रह गया है। हालांकि, सोने की कीमत अधिक होने के कारण कारोबार 28 हजार करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में सोने की बिक्री से 24 से 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। 23 जुलाई को आए केंद्रीय बजट में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया। अत: अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य वृद्धि की तीव्रता कम हो गई है।
सोने की खपत में आएगी कमी…
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2024 में भारत में सोने की खपत चार साल के निचले स्तर पर होगी। कीमतों में भारी बढ़ोतरी से सोने की बिक्री पर असर पड़ने वाला है। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। इस साल देश में सोने की मांग 700 से 750 टन के बीच रहेगी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन जैन ने बताया कि मांग में यह गिरावट 2020 के बाद से सबसे कम होगी।

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