Baba Siddiqui murder
मुंबई। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड (Baba Siddiqui murder) की जांच अब अटक गई है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी जांच में सहयोग नही कर रहे और लगातार विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। पुलिस का मानना है कि आरोपी जानबूझकर इस तरह से भ्रामक बयान दे रहे हैं ताकि जांच की दिशा को प्रभावित किया जा सके। यही वजह है कि अब इस हत्याकांड की जांच की गति काफी धीमी पड़ गई है।
दरअसल, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच की गाड़ी राजस्थान पहुंचकर अटक गई है। सिद्दीकी को हत्यारों ने जिन पिस्तौल से गोलियां चलाकर कत्ल किया था, वे हथियार राजस्थान से यहां लाये गये थे। दो आरोपियों भगवंत ओमसिंह और रामफूल कनौजिया को पुलिस ने इन हथियारों की सप्लाई के मामले में गिरफ्तार किया है। अब यह दोनों आरोपी इन हथियारों के स्त्रोत को लेकर विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। दोनों आरोपी मूलत: राजस्थान के रहनेवाले हैं।
पुलिस अधिकारियों को शक है कि तीन विदेशी पिस्तौल पाकिस्तान से राजस्थान लाये गये हैं। इन्हें राजस्थान सीमा के जरिये तस्करी में भारत में पहुंचाया गया होगा। उधर जब इन दोनों आरोपियों से इस बाबत पूछताछ की गई तो दोनों ने पुलिस को बताया कि वे एक दूसरे को जानते तक नहीं। दोनों आरोपियों का दावा है कि उदयपुर में मिलने से पहले वे अजनबी थे। उनके ऑपरेटर्स ने उन्हें केवल मिलने के ठिकाने और काम की दूसरी बाकी की तफसील दी थी, लेकिन इनको एक-दूसरे के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। तयशुदा ठिकाने पर ही तीनों आरोपी हथियार लेने के लिये इकट्ठा हुए थे।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जानेवाली यह काफी पुरानी तरकीब है। पुलिस का सारा जोर अब हथियारों के सोर्स का पता लगाने पर टिकी हुई है।
मजिस्ट्रेट अदालत ने चार आरोपियों गुरमई सिंह, धर्मराज कश्यप, हरीश निषाद और प्रवीण लोनकर की हिरासत 25 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपियों के बयान जांच में बाधा डाल रहे हैं।
Editorial

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