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तीन राज्यों में हार के बाद त्याग को तैयार कांग्रेस
By EditorialPublished on
हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में करारी हार के बाद कांग्रेस के तेवर इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर नरम पड़ते दिख रहे हैं। गुरूवार को दिल्ली में गठबंधन और सीट बंटवारे पर कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेताओं की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में एक तरफ राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा का नाम बदलने पर मुहर लगी तो वहीं सीट बंटवारे में भी बड़ा दिल दिखाने पर सहमति बनी है।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में करारी हार के बाद कांग्रेस के तेवर इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर नरम पड़ते दिख रहे हैं। गुरूवार को दिल्ली में गठबंधन और सीट बंटवारे पर कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेताओं की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में एक तरफ राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा का नाम बदलने पर मुहर लगी तो वहीं सीट बंटवारे में भी बड़ा दिल दिखाने पर सहमति बनी है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने 255 लोकसभा सीटों को टारगेट करने का फैसला लिया है। यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस एक तरह से 2019 के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार होगी। मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इंडिया अलायंस के दलों से सीट शेयरिंग पर तत्काल बात शुरू की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 5 सदस्यों वाली गठबंधन समिति से मुलाकात की है। उनसे पूछा है कि हम किन राज्यों में कितनी सीटों पर लड़ सकते हैं। इसके लिए राज्य इकाइयों से भी मशविरा किया गया है। कहा जा रहा है कि कमेटी ने लीडरशिप को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और राज्यवार बताया है कि हमें कहां लड़ना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि खड़गे ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों, महासचिवों समेत बड़े नेताओं की मीटिंग में 1255 सीटों का प्लान पेश किया है। इस मीटिंग में राहुल गांधी भी मौजूद थे। खरगे के प्रस्ताव को इस तरह से देखा जा रहा है कि कांग्रेस पिछली बार के मुकाबले कम सीटों पर लड़ने को तैयार होगी ।
कांग्रेस ने 2019 में 421 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 पर ही जीत पाई थी। तब वह बिहार में राजद, महाराष्ट्र में एनसीपी, कर्नाटक में जेडीएस और झारखंड में जेएमएम के साथ थी। यूपी, बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों में उसका कोई गठबंधन नहीं था। ऐसे में इस बार वह गठबंधन कर रही है तो यहां उसे कुछ सीटें त्यागनी ही होंगी। बंगाल में तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस को महज 2 सीटों का ऑफर दिया है, जबकि यूपी में भी अखिलेश यादव कोई ज्यादा रहम दिखाने के मूड में नहीं हैं। बिहार में तो कांग्रेस पहले भी 9 ही सीटों पर लड़ी थी। इस बार शायद उसे 6 सीटें ही मिल पाएं। वहीं कांग्रेस ने यूपी में 70 पर चुनाव लड़ा था और अब सपा क्या ऑफर देती है, यह देखना होगा।
उ.प्र. और पंजाब में मुश्किल, अखिलेश तो सिर्फ 10 सीटें देने को तैयार
बता दें कि आम आदमी पार्टी के साथ पंजाब में भी गठबंधन को लेकर चर्चा है, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बनी है। दोनों दलों के नेता दावेदारी के साथ ही तल्ख टिप्पणियां भी कर रहे हैं। यहां पेच यह है कि 2019 में कांग्रेस 8 सांसद जिता ले गई थी। अब वह इन सीटों को छोड़ना नहीं चाहती और आम आदमी पार्टी अपनी ताकत ज्यादा बताते हुए कांग्रेस से त्याग वाला समझौता चाहती है। यूपी में भी ऐसा ही माहौल है, जहां सपा ने 65 सीटों पर लड़ने का संकेत दिया है। आरएलडी और कांग्रेस के लिए वह 15 सीटें ही छोड़ना चाहती है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के हाथ 10 से ज्यादा सीटें शायद ही आ पाएं।
राहुल गांधी की यात्रा से 100 सीटें कवर करने का प्लान
इस बीच कांग्रेस ने मिशन 255 पर ही फोकस करने का लक्ष्य तय किया है और उसके हिसाब से ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा का रूट भी बना है। यह यात्रा जिन 15 राज्यों के 110 जिलों से होकर गुजरती है, उनमें 100 से ज्यादा लोकसभा सीटें आती हैं। यही नहीं यहां 335 विधानसभा सीटें भी पड़ती हैं। कांग्रेस मान कर चल रही है कि यात्रा से इन सीटों पर भी माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
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