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मुंबई। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) गुरुवार प्रातः घाटकोपर (Ghatkopar) भ्रमण को निकले। इस भ्रमण का घाटकोपरवासियों से पूर्ण लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं को उनके श्रीमुख से मंगलपाठ सुनने का अवसर मिला।
इसके बाद जब वे महाश्रमण समवसरण पहुँचे तो वहाँ महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले, मुम्बई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार व सांसद मनोज कोटक मौजूद थे। तीनों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद अपने प्रवचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मानव को जीवन जीने के लिए कितना कुछ करना होता है। काम करना, भोजन का प्रबन्ध करना, रहना, सोना, बैठना, दौड़ना-भागना, कमाना, उसके लिए तैयारी करना और न जाने कितने सारे कार्य वह जीवन जीने के लिए करता है। वह भी ऐसे जीवन के लिए जिसका कोई भरोसा ही नहीं है। कब किसका जीवन समाप्त हो जाए, यह भरोसे की बात नहीं है। फिर इस संदर्भ में यह प्रश्न किया गया कि फिर आदमी जीवन क्यों जीए? धार्मिक शास्त्रों में उत्तर प्रदान किया गया कि पूर्वकृत कर्मों का क्षय करने व मोक्ष की प्राप्ति के लिए मानव को जीवन जीना चाहिए। पुनः प्रश्न हुआ कि मोक्ष कौन प्राप्त कर सकता है? उत्तर प्रदान किया गया कि जिसके जीवन में धर्म
(religion)
हो, जो आत्म साधक हो, जो धर्म का आराधक हो, वह मोक्ष प्राप्त कर सकता है। अध्यात्म की साधना का परम लक्ष्य ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रतिप्रश्न किया गया कि कैसा हो धर्म का आराधक तो प्रत्युत्तर दिया गया कि शुद्ध हृदय वाला हो। शुद्ध हृदय उसका होता है जो सरल हो, ऋजु हो। जो सरल होता है, उससे यदि कोई गलती हो भी जाती है तो अपने गुरु अथवा प्रायश्चितदाता से प्रायश्चित्त प्राप्त कर शुद्ध हो जाता है। भूल चाहे साधु से हो या गृहस्थ से दोनों को प्रायश्चित्त कर लेना चाहिए। जो आदमी सरल होता है, उसमें ईमानदारी के गुण भी होते हैं। अपने जीवन में ईमानदार बनने का प्रयास करना चाहिए। गृहस्थ जीवन भी सदाचार और धर्माचरण से युक्त रहे, ऐसा प्रयास करना चाहिए।
मुम्बई प्रवास व्यवस्था समिति के मुख्य प्रबन्धक मनोहर गोखरू ने विचार रखे। स्थानीय महिला मण्डल (Mahila Mandal) व कन्या मण्डल (Kanya Mandal) ने गीत का संगान किया।
Editorial

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