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घाटकोपर में पांच दिनों तक ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं आचार्य महाश्रमण
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आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ बुधवार को घाटकोपर (Ghatkopar) पहुंचे। उन्हें अपने क्षेत्र में पाकर घाटकोपरवासियों का श्रद्धा, उत्साह व उमंग का पारावार नहीं था। उनकी आतंरिक प्रसन्नता उनकी प्रसन्न मुखाकृति तथा उनके द्वारा किए जाने वाले बुलंद जयघोष में दृष्टिगोचर हो रहा था। स्थान-स्थान पर किशोरों-किशोरियों व ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों द्वारा लगाई गई झांकियां लोगों का मन मोह रही थीं। उनके आगमन से घाटकोपर का वातावरण पावन बना हुआ था। सभी श्रद्धालुओं व मार्ग के खड़े दर्शनार्थियों पर आशीष

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मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ बुधवार को घाटकोपर (Ghatkopar) पहुंचे। उन्हें अपने क्षेत्र में पाकर घाटकोपरवासियों का श्रद्धा, उत्साह व उमंग का पारावार नहीं था। उनकी आतंरिक प्रसन्नता उनकी प्रसन्न मुखाकृति तथा उनके द्वारा किए जाने वाले बुलंद जयघोष में दृष्टिगोचर हो रहा था। स्थान-स्थान पर किशोरों-किशोरियों व ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों द्वारा लगाई गई झांकियां लोगों का मन मोह रही थीं। उनके आगमन से घाटकोपर का वातावरण पावन बना हुआ था। सभी श्रद्धालुओं व मार्ग के खड़े दर्शनार्थियों पर आशीष वृष्टि करते हुए आचार्य महाश्रमण वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ भवन में पधारे। यहीं आचार्यश्री का प्रवास निर्धारित है।
वहां से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित विधायक पराग शाह के स्थान में बने प्रवचन पंडाल में आचार्य महाश्रमण पहुंचे तो वहां आचार्यश्री के अभिवादन में बौद्ध धर्मगुरु राहुलबोधि भी उपस्थित थे। प्रवचन में आचार्य महाश्रमण ने हुए कहा कि आदमी के भीतर अनेक वृत्तियां होती हैं। अच्छी वृत्ति होती है तो उसी आदमी के भीतर बुरी वृत्ति भी होती है। ये वृत्तियां कषायों के कारण बुराई से भावित हो जाती हैं। उनमें एक बुरी वृत्ति लोभ की होती है। जैन धर्म में चार प्रकार के कषाय बताए गए हैं-क्रोध, मान, माया और लोभ। कहा जाता है कि आदमी की इच्छाएं आकाश के समान अंतहीन हैं। अगर उसे सोने का पहाड़ भी प्राप्त हो जाए तो लोभ की वृत्ति बनी रहेगी। इस लोभ की वृत्ति को दूर करने के लिए आदमी को संतोष रूपी सद्गुण का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए आदमी को भौतिकता के माहौल से निकल अध्यात्म के सिद्धांतों के आसपास रहने का प्रयास करना चाहिए। अध्यात्म के शरण में रहने से शांति की प्राप्ति हो सकती है।
आचार्यश्री ने घाटकोपर के श्रावकों को शुभाशीष प्रदान करते हुए कहा कि यहां की जनता में अच्छी धार्मिक भावना बनी रहे। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी उपस्थित जनता को सम्बोधित किया। बौद्ध धर्मगुरु राहुलबोधि ने कहा कि मैं घाटकोपर में आपका हार्दिक स्वागत करता हूं। आप भ्रमण करते हुए कितना जनकल्याण का कार्य कर रहे हैं। आप लोगों को सुख-शांति का मार्ग दिखा रहे हैं।
विधायक पराग शाह ने आशीर्वाद प्राप्त किया। स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष शांतिलाल बाफना, स्वागताध्यक्ष श्रीमती कांता तातेड़ व श्रीमती शर्मिला तातेड़, स्थानकवासी संघ के अध्यक्ष विपीन भाई व मुकेश भाई ने भी अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-घाटकोपर ने स्वागत गीत का संगान किया।

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