Lok Sabha Elections
पटना (एजेंसी)। अयोध्या (Ayodhya) में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब देश में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) की राजनीति जोर पकड़ने लगेगी। बिहार (Bihar) में इसकी शुरूआत सीमांचल से होगी। राजग एवं आइएनडीआइए के बड़े नेता अपने चुनावी अभियान का श्रीगणेश यहीं से करेंगे। भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कटिहार में 30 जनवरी को चुनावी अभियान शुरू करेंगे। वे भाजपा की ओर से चार लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं यानी पूर्णिया क्लस्टर में आने वाले संसदीय क्षेत्र की रैली को संबोधित करेंगे।
हालांकि रैली की तिथि में फेर-बदल की संभावना भी है। वहीं, कांग्रेस (Congress) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी 30 या 31 जनवरी को पूर्णिया या कटिहार में रैली करेंगे। इसके बाद वे बंगाल की सीमा में प्रवेश करेंगे। 2019 में एनडीए की उस समय की सहयोगी जदयू ने कटिहार एवं पूर्णिया संसदीय क्षेत्र पर जीत हासिल की थी। अररिया संसदीय क्षेत्र में भाजपा ने परचम लहराया था, जबकि किशनगंज कांग्रेस के हिस्से में गई थी। दो प्रमुख दलों के दो बड़े नेताओं के सीमांचल में होने से तय है कि अब लोकसभा चुनाव की राजनीति गरमाएगी ।
सीमांचल के चार जिलों में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के स्वागत की तैयारी शुरू हो गई है। पूर्णिया में ही जनसभा की तैयारी है। उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था पूर्णिया या अररिया में होगी। राहुल की न्याय यात्रा किशनगंज के रास्ते बिहार में प्रवेश करेगी। सीमांचल का क्षेत्र कांग्रेस के लिए अनुकूल रहा है। विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी इस इलाके में कांग्रेस के पांच विधायक व एक सांसद हैं। कटिहार के कदवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक शकील अहमद खान विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी हैं। कांग्रेस के बड़े चेहरे व पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर कटिहार से सांसद रह चुके हैं। राहुल की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है कि कांग्रेस का जो वोट बैंक क्षेत्रीय दलों के पास गया है, उसे वापस किया जाए।
कटिहार सीट हासिल करना भाजपा के लिए चुनौती
भाजपा कटिहार सीट इस बार हासिल करने की पूरी तैयारी में जुट गई है। भाजपा के निखिल चौधरी इस सीट से सांसद रह चुके हैं, लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद भाजपा नाकाम रही थी।
Editorial

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