modi
नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर (Ram Mandir) के शुभारंभ के साथ अयोध्या (Ayodhya) से रामेश्वरम (Rameshwar) तक की सियासत भी साध ली। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 12 जनवरी से 21 जनवरी के बीच दक्षिण भारत के दौरे पर रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामपथ के पांच राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और आखिर में यूपी (UP) के अयोध्या पहुंचे। इन पांच राज्यों में लोकसभा की 211 सीटें आती हैं। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के हिस्से महज 75 सीटें ही हैं। यह सभी सीटें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र (Maharashtra) के हिस्से में हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल भारतीय जनता पार्टी के लिए एक तरह से अब तक राजनीतिक तौर पर 'ड्राई स्टेट' हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राममंदिर के प्रांगण से इन राज्यों के लिए एक ऐसा संदेश भी दिया, जो कि भारतीय जनता पार्टी को सियासी रूप से बेहद फायदेमंद लग रहा है। जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री ने 'सरयू से सागर' की बात को छेड़ कर एक इमोशनल कनेक्ट बनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 11 दिन के उपवास और अनुष्ठान के दौरान महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण भारत के सभी राज्यों का दौरा किया। इसमें प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के नासिक से लेकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु समेत केरल के 7 मंदिरों में पूजा अर्चना भी की। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एन सुदर्शन कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने जिन दक्षिण के राज्यों में पूजा अर्चना की है, उनमें से किसी भी राज्य में भारतीय जनता पार्टी का कोई सांसद नहीं है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में तो भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के सांसद हैं। जबकि राजनीतिक तौर पर 'ड्राई स्टेट' के तौर पर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल हैं। वह कहते हैं कि वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप और कर्नाटक में भी दौरा किया, लेकिन वह यहां के किसी भी मंदिर में नहीं गए।
सुदर्शन कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामपथ के इन तीन राज्यों में पूजा अर्चना करके भारतीय जनता पार्टी को सियासी तौर पर मजबूत करने का अयोध्या से सीधा संदेश दिया है। सुदर्शन कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री ने राम ज्योति जलाने की जो अपील की थी, दक्षिण भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी लोगों ने खूब प्रज्वलित की। भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस दक्षिण भारत के राज्यों में अयोध्या के राम मंदिर को पूरी तरीके से सियासी तौर पर भी बढ़ा रही है। भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक दक्षिण भारत के सभी राज्यों से 27 जनवरी से अयोध्या दर्शन की व्यवस्था शुरू होने जा रही है। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से जुड़े एन सत्यमूर्ति कहते हैं कि अगले एक महीने के भीतर तमिलनाडु के प्रत्येक जिले से लोग अयोध्या दर्शन करने जा रहे हैं। वह कहते हैं कि इसकी जिम्मेदारी अलग-अलग जिलों में अलग-अलग पदाधिकारी के पास है। सत्यमूर्ति का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह अयोध्या में सरयू से सागर का जिक्र कर अयोध्या को तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के रामपथ वाले राज्यों को जोड़ा है, उससे यहां के लोगों का नाता और रिश्ता प्रभु राम से और गहरा हुआ है। वह कहते हैं कि तमिल समागम जैसे बड़े आयोजनों से उनका राज्य उत्तर भारत से सीधे तौर पर जुड़ रहा है। अयोध्या का राम मंदिर दक्षिण भारत को जोड़ने के लिए कड़ी बन रहा है। भाजपा की राम दर्शन यात्रा इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव
(Loksabha Election)
में दक्षिण भारत का राजनीतिक द्वार भेदने का माध्यम बनेगी। अयोध्या के लिए इस देशव्यापी यात्रा की शुरूआत तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मंदिरों का शहर कहे जाने वाले मदुरै से होगी। आस्था स्पेशल ट्रेनों से 25 हजार तमिल भाषी रामभक्तों का पहला जत्था यहां पहुंचेगा। इसी तरह आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल व पुडुचेरी से भी लाखों श्रद्धालु आएंगे। जानकारों की मानें, तो राम दर्शन यात्रा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए बेहद खास है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी निगरानी के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर अलग-अलग उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। केंद्रीय समिति का नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष को सौंपा गया है। इनका सहयोग तीन अन्य राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, तरूण चुग और विनोद तावड़े करेंगे।
Editorial

Editorial

Next Story