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इंसुलिन अब कैप्सूल के जरिए भी ले सकेंगे मधुमेह रोगी
By EditorialPublished on
वैज्ञानिकों ने शरीर को इंसुलिन ( insulin ) की आपूर्ति करने का एक नया तरीका खोज लिया है। इससे मधुमेह रोगी (Diabetic patients) अब कैप्सूल के जरिये भी इंसुलिन ले सकेंगे। यह इंसुलिन के लिए सीरिंज या इंसुलिन पंप की जरूरत खत्म कर सकता है। विज्ञान पत्रिका नेचर नैनोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में जानकारी सामने आई है।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। वैज्ञानिकों ने शरीर को इंसुलिन ( insulin ) की आपूर्ति करने का एक नया तरीका खोज लिया है। इससे मधुमेह रोगी (Diabetic patients) अब कैप्सूल के जरिये भी इंसुलिन ले सकेंगे। यह इंसुलिन के लिए सीरिंज या इंसुलिन पंप की जरूरत खत्म कर सकता है। विज्ञान पत्रिका नेचर नैनोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में जानकारी सामने आई है।
अध्ययन के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने इंसुलिन देने के लिए विशेष प्रकार के नैनो कण विकसित किए हैं। इन नैनो वाहक में इंसुलिन मौजूद है। ये कण मानव बाल का 1/10,000वां हिस्सा हैं और इतने छोटे हैं कि इन्हें सामान्य माइक्रोस्कोप से भी नहीं देखा जा सकता। इन नैनो वाहकों के माध्यम से डायबिटीज के मरीजों में लिवर तक इंसुलिन पहुंचाना अधिक आसान है।
क्या है इंसुलिन
इंसुलिन एक खास तरीके का हार्मोन है, जो अग्नाशय में बनता है। अग्नाश्य के अंदर बहुत सारी कोशिकाएं होती हैं, जिसमें से एक कोशिका का नाम बीटा सेल है। | इंसुलिन के हार्मोन को एनाबॉलिक हार्मोन (anabolic hormones) भी कहा जाता है। यह हार्मोन शरीर के विकास के लिए जिम्मेदार है। उदाहरण के लिए हम जो खाते हैं वह शरीर के विकास में किस तरीके से काम आएगा, यह बहुत हद तक इंसुलिन पर निर्भर है।
शुगर पर नियंत्रण
इंसुलिन का मुख्य काम शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखना है। पचने के बाद भोजन ग्लूकोज में बदलता है। शरीर में जैसे ही ग्लूकोज की मात्रा बढ़ती है तो बीटा सेल्स को इसका सिग्नल मिलता है। इसके बाद बीटा सेल्स के अंदर बनने वाला इंसुलिन इस ग्लूकोज को शरीर की छोटी-छोटी कोशिकाओं में बांट देता है। इससे बॉडी के अंदर ग्लूकोज (glucose) की मात्रा संतुलित रहती है।
लिवर तक सुरक्षित पहुंच से मिलता है आराम
शोधार्थियों ने बताया, इंसुलिन के साथ समस्या यह है कि यह पेट में टूट जाता है और इस प्रकार शरीर में जहां इसकी आवश्यकता होती है, वहां नहीं पहुंच पाता है। मुंह से ली जा सकने वाली मधुमेह की दवा विकसित करने में यह एक बड़ी चुनौती रही है।
प्रमुख शोधार्थी पीटर मैककोर्ट ने कहा, हमने पाचन तंत्र के माध्यम से पेट के एसिड और पाचन एंजाइमों द्वारा इंसुलिन को टूटने से बचाने के लिए एक कोटिंग बनाई है। यह इसे अपने गंतव्य यानी लिवर तक पहुंचने तक सुरक्षित रखती है। इस कोटिंग को एंजाइमों द्वारा लिवर में तोड़ दिया जाता है, जो केवल तब सक्रिय होते हैं जब रक्त शर्करा का स्तर ऊंचा होता है। इसके बाद लिवर (Liver) में इंसुलिन पहुंच जाता है, जो रक्त से शुगर (Sugar) को हटाने के लिए कार्य करता है।

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