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स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री पहुंचे बदलापुर
By EditorialPublished on
मुंबई (Mumbai) में ऐतिहासिक चातुर्मास संपन्न कर मायानगरी मुम्बई के एक-एक उपनगर में अध्यात्म की गंगा प्रवाहित करते, जन मानस को आध्यात्मिक अभिसिंचन प्रदान करते हुए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ उल्हासनगर से विहार कर बदलापुर (Badlapur) के विभिन्न परिसर से होते हुए रैनी रिपोर्ट में प्रवास स्थल पर पधारें । बडी संख्या में भाविक भक्त दर्शन को उमड रहे थे । अपने ही आँगन में आचार्यश्री का दर्शन पाकर भाविक भक्त उत्साहित नजर आये । आचार्
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बदलापुर । मुंबई (Mumbai) में ऐतिहासिक चातुर्मास संपन्न कर मायानगरी मुम्बई के एक-एक उपनगर में अध्यात्म की गंगा प्रवाहित करते, जन मानस को आध्यात्मिक अभिसिंचन प्रदान करते हुए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ उल्हासनगर से विहार कर बदलापुर (Badlapur) के विभिन्न परिसर से होते हुए रैनी रिपोर्ट में प्रवास स्थल पर पधारें । बडी संख्या में भाविक भक्त दर्शन को उमड रहे थे । अपने ही आँगन में आचार्यश्री का दर्शन पाकर भाविक भक्त उत्साहित नजर आये । आचार्य महाश्रमण आशीर्वाद प्रदान करते हुए अपने मंगल उद्बोधन में कहा की अहिंसा एक धर्म है। साधुओं के लिए तो अहिंसा एक महाव्रत भी है। अहिंसा का पालन करना साधुओं का आध्यात्मिक धर्म भी है। पुनर्जन्म, आत्मवाद, आस्तिकवाद को मानने वाले के लिए अहिंसा धर्म है। अहिंसा एक नीति भी है। राज्य, देश व विश्व के लिए अहिंसा एक नीति है। राजनीति में किसी भी जाति, किसी भी धर्म के व्यक्ति को चुनाव जीतकर उच्च पद पर आसीन होने की बात भी अहिंसा से जुड़ी हुई है।
अहिंसा धर्म भी है और राष्ट्रीय नीति भी है। चलाकर किसी पर आक्रमण नहीं करना, अहिंसा की नीति है। परिवार की नीति में अहिंसा हो। नगर में शांति बनी रहे, कानून व्यवस्था बनी रहे। जो नियमों को नहीं मानता, किसी को कष्ट देता है तो फिर प्रशासन दण्ड देती है तो वह कार्य भी नीतिगत ही होता है। शांति की स्थापना के लिए प्रशासन द्वारा यदि अशांति फैलाने वालों पर यदि लाठी का प्रयोग करे तो वहां पर साध्य अच्छा है। साधु को कोई कष्ट भी दे दे तो भी साधु का अहिंसा का व्रत होता है तो वह उसको समता से सहन कर लेता है। इस संदर्भ में साधु पुलिस थाने या किसी प्रकार की शिकायत भी नहीं करनी चाहिए। सेना का जवान भले ही किसी देश पर आक्रमण न करे, किन्तु यदि कोई अपने देश पर आक्रमण कर दे तो उसे रोकने के लिए सैनिक शस्त्र उठाते हैं और अपने राष्ट्र, अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए वे शस्त्र का प्रयोग करें तो वह न्याय संगत है।
आचार्यश्री ने बदलापूरवासियों को पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आज बदलापूर आए हैं। यहां आक्रोश के रूप में बदले की भावना न रहे, बल्कि सात्विक बदलाव की भावना हो। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने बदलापूरवासियों को उद्बोधित किया। स्थानीय तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने स्वागत गीत का संगान किया। स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री भैरूलाल पगारिया, मूर्तिपूजक समाज की ओर से श्री सुबोध परमार व श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रावक संघ (Shwetambar Idol worshiping Shravak Sangh) के श्री राजेश खाटेड़ ने विचार रखे । तेरापंथ युवक परिषद के सदस्यों ने भी गीत का संगान किया। संत सेवा मण्डल के सदस्यों ने आचार्यश्री से नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया।
आचार्य श्री के मंगल प्रवेश पर अणुव्रत रैली निकाल कर प्रवास स्थल बदलापुर पहुंचे । वहां पर ज्ञानशाला के बच्चों ने परेड देकर गुरुदेव का स्वागत किया । ज्ञानशाला के बच्चों ने परिसंवाद से स्थावरकाय जीव की परिभाषा बताई । शहर अध्यक्ष संजय भोईर, नगरसेवक संभाजी शिंदे, शरद तेले , राजेंद्र गोरपड़े, वामन म्हात्रे, तेरापंथ समाज के मांगीलाल सिंघवी, प्रकाश पगारिया, मुकेश मेहता, नरेश सांखला, विनोद कच्छारा, राजेश मुनोत, भरत कच्छारा, तनसुख सिंघवी, जीतमल गुंदेचा, रुचिका घोरपड़े आदि उपस्थित थे । इस प्रसंग पर बडी संख्या में जैन समाज के अनेक श्रावक के साथ आस पास परिसर के अंबरनाथ, भिवंडी, कल्याण, डोंबिवली और चेंबूर के श्रावक गण उपस्थित थे ।

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