✕
आर्थिकी में धार्मिक पर्यटन का योगदान
By EditorialPublished on
डा. अश्विनी महाजन : महज तीन दिनों बाद यानी 22 जनवरी अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तो बन ही रहा है, दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु होटल और अन्य प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण तेजी से हो रहा है।

x

डा. अश्विनी महाजन : महज तीन दिनों बाद यानी 22 जनवरी अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तो बन ही रहा है, दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु होटल और अन्य प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण तेजी से हो रहा है। इससे न केवल शहर में और इसके आसपास पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह शहर एक क्षेत्रीय विकास केंद्र में बदल जाएगा, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापक क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वैश्विक मानकों का एक पर्यटक शहर, जो प्रतिदिन लाखों पर्यटकों को आकर्षित करेगा, पड़ोसी जिलों की अर्थव्यवस्था में भी क्रांति का स्रोत बन सकता है।
रोजगार : जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन चल रहा था, देश में कुछ लोग यह सुझाव दे रहे थे कि मंदिर के स्थान पर यदि अस्पताल या शिक्षण संस्थान खोल दिए जाएं तो लोगों को लाभ होगा। कांग्रेस शासन के दौरान सरकार के काफी निकट और हाल ही में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा में उनके साथ गए एक टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा ने कहा कि मंदिर रोजगार पैदा नहीं करते। स्वाभाविक तौर पर वर्तमान में मंदिरों के प्रति आग्रह के संदर्भ में उनकी यह टिप्पणी रही होगी। सैम पित्रोदा चाहे कुछ भी कहें, मंदिरों का अर्थशास्त्र भी समझने की आज बहुत जरूरत है । यह सही है कि कृषि, उद्योग और सेवाओं का अपना- अपना अर्थशास्त्र होता है, जिसके आधार पर हम देश के विकास की रूपरेखा तैयार करते हैं। लेकिन मंदिरों के विरूद्ध बोलने वाले लोग भूल जाते हैं कि धार्मिक सेवाओं और मंदिरों का भी अपना एक अर्थशास्त्र होता है। हर मंदिर में आकर्षक शिल्पकला, भव्यता, अलौकिक विग्रहों के कारण यह आध्यात्मिक होने के साथ- साथ ये पर्यटन स्थल भी थे ।
अब जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने जा रहा है, तो यह समझने की आवश्यकता है कि मंदिर, धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन हमारे देश और और जनता के लिए कितने लाभकारी हो सकते हैं। मंदिरों से भी भारी रोजगार सृजन होता है। मंदिरों के आसपास असंख्य लोग अपना जीवनयापन करते हैं और मंदिरों में भी आधुनिकीकरण एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के माध्यम से न केवल उन सेवाओं के स्तर को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि जीडीपी में भी उनके योगदान में वृद्धि की जा सकती है। इसलिए अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की ही भांति मंदिर अर्थव्यवस्था के बारे में भी विचार करना जरूरी है। लगभग 20 लाख से अधिक मंदिरों वाले भारत देश में करीब 4 करोड़ लोग पर्यटन और यात्रा के उद्योग से सीधे जुड़े हुए हैं। धार्मिक और मंदिर पर्यटन उसका एक बड़ा हिस्सा है। मोदी सरकार भी योजनाबद्ध रूप से इस मंदिर अर्थव्यवस्था को और अधिक पुष्ट करने का कार्य कर रही है। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए महाकाल लोक, वाराणसी में काशी कारिडोर, केदारनाथ में मंदिर जीर्णोद्धार, ओमकारेश्वर में एकात्म धाम, कश्मीर में शारदा पीठ का जीर्णोद्धार और उत्तराखंड में कैलाश दर्शन का विकास उसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
हम देखते हैं कि आज भी भारत में कई शहरों और कस्बों की एक बड़ी आबादी अपनी जीविका के लिए मंदिरों एवं तीर्थ स्थानों पर ही निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, अयोध्या, कुशीनगर, उत्तराखंड में हरिद्वार, ऋषिकेश, केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री मंदिर प्रसिद्ध हैं। यदि हम देखें तो लगभग सभी राज्यों में एक या एक से अधिक बड़े धार्मिक केंद्र हैं। तमिलनाडु रामेश्वरम मंदिर और कई अन्य मंदिर हैं। ओडिशा में जगन्नाथ पुरी मंदिर, गुजरात में सोमनाथ और द्वारका, पंजाब में स्वर्ण मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
पर्यटन : जिन शहरों में ऐसे मंदिर स्थित हैं, वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सैलानियों का आना होता है। कई स्थान तो ऐसे हैं, जहां एक ही दिन में लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। जम्मू के कटरा में स्थित अकेले वैष्णों देवी मंदिर में ही वर्ष 2023 के दौरान 95 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। आंध्र प्रदेश में स्थित तिरूपति बालाजी मंदिर में हर साल तीन से चार करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी प्रकार से अलग-अल मंदिरों में करोड़ों लोग हर साल दर्शन करने जाते हैं। यह स्वाभाविक धार्मिक पर्यटन हमारे कुल पर्यटन व्यवसाय का एक बड़ा भाग है, जिससे बड़ी मांग का सृजन होता है। अनुमान है कि भारत में धार्मिक पर्यटन का हिस्सा कुल घरेलू पर्यटन में 60 प्रतिशत है, जबकि 11 प्रतिशत विदेशी सैलानी धार्मिक उद्देश्य से आते हैं। उल्लेखनीय है कि भारत की जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा लगभग सात प्रतिशत है और देश के कुल रोजगार में इसका हिस्सा आठ प्रतिशत है। यानी यह क्षेत्र चार करोड़ लोगों को रोजगार देता है। ऐसे में कुल घरेलू पर्यटन में जहां धार्मिक पर्यटन का योगदान 60 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में 11 प्रतिशत होने के कारण मंदिरों की भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान के बारे में कोई संदेह नहीं हो सकता।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार जहां पिछले वर्ष 2022 में 14.33 करोड़ भारतीय लोगों ने मंदिरों, तीर्थों में में भ्रमण किया, वहीं 64.4 लाख विदेशी पर्यटकों ने भी इन स्थानों पर भ्रमण किया। वर्ष 2022 में 1.35 लाख करोड़ की आमदनी इन तीर्थ स्थानों पर हुई। समझा जा सकता है कि जो लोग ऐसा कहते हैं कि मंदिरों से रोजगार निर्माण नहीं होता अथवा मंदिरों का भारतीय अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं है, उन्हें इन तथ्यों को जानना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि धार्मिक एवं तीर्थ पर्यटन की संभावनाओं के अनुरूप इन क्षेत्रों का विकास करते हुए देश के विकास में इनके योगदान को बढ़ाया जाए। इस हेतु मंदिरों का जीर्णोद्धार, सस्ते और महंगे सभी प्रकार के होटलों का निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं का विस्तार और इन केंद्रों में पर्यटन सूचना केंद्रों की स्थापना और इन तक पहुंचने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ उनका जुड़ाव आदि कुछ ऐसे कार्य हैं, जिसके द्वारा इन तीर्थ स्थलों एवं मंदिरों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को पुष्ट किया जा सकता है।

Editorial
Next Story
Related News
X
