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पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में कोविड के नये वैरिएंट पर होगा अनुसंधान
By EditorialPublished on
पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (Patanjali Research Foundation) ने कोरोना (Corona) के नये वैरिएंट पर अनुसंधान करने हेतु चीन की लैब से स्पाइक प्रोटीन मंगाया गया है, जिस पर पतंजलि के वैज्ञानिक रिसर्च करेगें। कोरोना का नया वैरिएंट ऑमीक्रोन जेएन-1 पुनः सम्पूर्ण विश्व में अपने पैर पसार रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में अपने अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा चीन की लैब से मंगाये गये स्पाइक प्रोटीन पर नवीन अनुसंधान कार्य आरम्भ कर दिया गया है। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण (A

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हरिद्वार, 17 जनवरी । पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (Patanjali Research Foundation) ने कोरोना (Corona) के नये वैरिएंट पर अनुसंधान करने हेतु चीन की लैब से स्पाइक प्रोटीन मंगाया गया है, जिस पर पतंजलि के वैज्ञानिक रिसर्च करेगें। कोरोना का नया वैरिएंट ऑमीक्रोन जेएन-1 पुनः सम्पूर्ण विश्व में अपने पैर पसार रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में अपने अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा चीन की लैब से मंगाये गये स्पाइक प्रोटीन पर नवीन अनुसंधान कार्य आरम्भ कर दिया गया है। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) ने कहा कि पतंजलि अनुसंधान संस्थान वह पहली संस्था है जहाँ ऑमीक्रोन जेएन-1 वायरस का स्पाइक प्रोटीन चीन की साइनो बॉयोलॉजिकल लैब से पहुंच चुका है। यह वायरस बहुत खतरनाक है परन्तु उसकी स्पाइक प्रोटीन पर कार्य करके ही उसका समाधान पाया जा सकता है।स्पाइक प्रोटीन पर अनुसंधान कर हम विश्व को पुनः यह दिखायेंगे कि पतंजलि किस प्रकार से आयुर्वेदिक औषधियों पर अनुसंधान कर उनका निर्माण करता है तथा मॉडर्न मेडिकल सांइस के जो स्टैण्डर्ड तथा पैरामीटर्स है उन पर योग व आयुर्वेद को पुनः स्थापित करने का कार्य पतंजलि कर रहा है। संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि स्पाइक प्रोटीन पर कोरोनिल के इस्तेमाल से इन्फेक्शन कन्ट्रोल का ट्रॉयल किया जायेगा, जिसके परिणाम वायरस कन्ट्रोल के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करेंगे।

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