mahesh joshi
कार्यालय संवाददाता जयपुर। राजस्थान (Rajasthan) में गहलोत सरकार (Gehlot sarkar) में पीएचडी मंत्री रहे महेश जोशी (Mahesh Joshi), अफसरों और विभाग के ठेकेदारों पर छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने बरामदगी को लेकर जानकारी सार्वजनिक की है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) में कथित घोटाले से जुड़ी छापेमारी में ईडी (ED) ने कुल 39 लाख रूपए कैश, प्रॉपर्टी के दस्तावेज, डिजिटल सबूत और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक आधिकारिक बयान में बुधवार को कहा, ईडी ने 16 जनवरी को जयपुर और बांसवाड़ा में 8 स्थानों पर छापेमारी की। जल जीवन मिशन घोटाले में पीएमएलए, 2002 के तहत राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री महेश जोशी, पीएचईडी के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ छापेमारी की गई। बयान में यह भी बताया गया कि इस दौरान 39 लाख रूपए बेनामी कैश, प्रॉपर्टी डिटेल अहम दस्तावेज, डिजिटल सबूत और मोबाइल जब्त किए गए। ईडी ने बताया कि मंगलवार की जब्ती के बाद समेत इस केश में बरामदगी 11.42 करोड़ रूपए तक पहुंच चुकी है, जिसमें 6.50 करोड़ रूपए के सोना/चांदी शामिल है।
इससे पहले 3 नवंबर को भी एजेंसी ने पीएचडी के तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल और सचिवालय में जोशी के दफ्तर में सर्च ऑपरेशन चलाया था। जहां कई दस्तावेज बरामद किए गए थे। इसी केस में जोशी के ठिकानों पर एक सितंबर को भी छापेमारी की गई थी। मौजूदा भाजपा विधायक और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने पिछले साल जून में जल जीवन मिशन में 20 हजार करोड़ रूपए के घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पीएचईडी मंत्री महेश जोशी ने टेंडर बांटने में भ्रष्टाचार (Corruption) किया। मीणा ने दावा किया था कि ठेकेदारों ने फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट जमा किए थे। सितंबर में मीणा जयपुर में ईडी दफ्तर पहुंचे थे और दस्तावेज सौंपने का दावा किया था। हालांकि, ईडी की ताजा छापेमारी को मंगलवार को जोशी ने बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा, इंडी भेजना एक बदला है। उन्होंने फिर राजनीतिक उद्देश्य से ईडी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सरकार बदल चुकी है। जल जीवन मिशन अब उनके हाथ में है। वे क्यों नहीं हमें बताते हैं कि क्या अनियमितता हुई?
Editorial

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