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मुलुंड बनी आराध्यमय नगरी
By EditorialPublished on
आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुलुंड (Mulund) में दो दिवसीय प्रवास किया। मुलुंडवासियों ने उनकी अगवानी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। साध्वी निर्वाणश्री व साध्वी योगक्षेमप्रभा के मार्गदर्शन में जैन समाज ने मुलुंड को आराध्यमय बना दिया। आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में दो दिनों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आचार्यप्रवर ने भव्य रैली के साथ नगर प्रवेश किया। उन्होंने प्रवचन स्थल कालिदास हॉल में धर्म देशना प्रदान की। प्रात: प्रवचन में आस्था का सैलाब उमड़ता तो रात्रि में चरण स्पर्श के लिए लंबी कत

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मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुलुंड (Mulund) में दो दिवसीय प्रवास किया। मुलुंडवासियों ने उनकी अगवानी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। साध्वी निर्वाणश्री व साध्वी योगक्षेमप्रभा के मार्गदर्शन में जैन समाज ने मुलुंड को आराध्यमय बना दिया। आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में दो दिनों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आचार्यप्रवर ने भव्य रैली के साथ नगर प्रवेश किया। उन्होंने प्रवचन स्थल कालिदास हॉल में धर्म देशना प्रदान की। प्रात: प्रवचन में आस्था का सैलाब उमड़ता तो रात्रि में चरण स्पर्श के लिए लंबी कतारें लगती। पारिवारिक सेवा दोपहर 3 बजे होती थी। आचार्यश्री ने मुंबई पब्लिक स्कूल (Mumbai Public School) में प्रवास किया जबकि साध्वी प्रमुखा का प्रवास स्थल वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ भवन रहा।
आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि साधुजनों की संगति सत्संगति अर्थात् अच्छी संगति करना। साधु की पर्युपासना करना, उनके वचनों का श्रवण करना सत्संगति होती है। दूसरी बात कि साधु-महात्मा हमेशा मिलें या न मिलें तो अच्छी पुस्तकों के पठन से सत्संगति होती है। आज के समय में टेलीविजन, मीडिया आदि के द्वारा धर्मगुरुओं का प्रवचन श्रवण किया जाए तो वह किसी रूप में सत्संगत हो सकती है। सत्संगति से कुछ अच्छा सुनने को मिल सकता है। जो आदमी साधुओं के पास आता ही नहीं तो उसे प्रत्यक्ष रूप से साधुओं के वचन को श्रवण करने का लाभ भला कैसे प्राप्त हो सकता है। साधु की पर्युपासना से जो अच्छा सुनने को मिलता है, वह श्रवण ज्ञान प्राप्ति का अच्छा माध्यम होता है। सुनकर आदमी पाप को भी जनता और पुण्य को भी जानता है। सुनने से ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। पुस्तकों को पढ़ने से भी ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है, किन्तु किसी समय ज्ञान श्रवण करने से ही प्राप्त होता था। आदमी को जब विवेक हो जाता है तो वह त्याग करता है। संयम हो जाता है तो फिर आदमी त्याग की दिशा में आगे बढ़ सकता है। त्याग हो जाता है तो फिर संयम की प्राप्ति हो जाती है। संयम हो गया तो कर्मों के आने का रास्ता बंद हो जाता है। फिर तपस्या आदि से पूर्व कर्मों की निर्जरा होती है और स्थिती बढ़ते-बढ़ते मोक्ष की प्राप्ति भी हो सकती है।
उन्होंने अजरामर सम्प्रदाय के साधुओं को प्रेरणा देते कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में मनोबल मजबूत रहे, आध्यात्मिक साधना की उन्नति होती रहे, खूब अच्छा विकास होता रहे। उपस्थित साध्वी मीराबाई व साध्वी कृष्णाबाई ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। मुलुण्ड समाज की ओर से विजय पटवारी ने आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। ज्ञानार्थियों ने भी प्रस्तुति दी। युवक परिषद के सदस्यों ने गीत का संगान किया। कन्या मण्डल ने भी प्रस्तुति दी। जैन विश्व भारती के मंत्री सलिल लोढ़ा ने भी अभिव्यक्ति दी। नव्यान चोरड़िया ने अपनी कलाकृति प्रस्तुत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सभाध्यक्ष चुन्नीलाल सिंघवी ने भी विचार व्यक्त किए।
आचार्य प्रवर मुख्यमुनि महावीर कुमार साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा साध्वी वर्या संबुद्ध यशा सहित धवल वाहिनी का मुलुंडवासियों ने अभिवंदना की। डिजिटल डिटॉक्स कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। मुनि अभिजीत कुमार मुनि जागृत कुमार मुनि मननकुमार मुनि गोरवकुमार का सानिध्य रहा। श्वेता लोढ़ा रेणु कोठारी अंकित सिंघवी ने प्रशिक्षण दिया। संचालन चिराग पामेचा ने किया। उत्तम पीपाड़ा सुनील इंटोदिया गजेंद्र पीपाड़ा सक्रिय रहे।
शाम को भिक्षु भक्ति में निलेश बापना दिव्या बोलिया अनिता सियांल ने भक्ति से सराबोर किया। प्रवास को ऐतिहासिक बनाने साध्वी निर्वाणश्री ठाणा 6 की प्रेरणा रही।

सभाध्यक्ष चुन्नीलाल सिंघवी, मंत्री संजय सिंघवी, युवक परिषद् अध्यक्ष कमलेश चोरडिया, मंत्री अरिहंत लोढा के साथ विजय पटवारी, सुनील इंटोदिया, हिम्मत सिंघवी, पवन गेलड़ा, निर्मल धींग, राकेश टुकलिया, रवि पटवारी, मूलचंद धाकड़, महिला मंडल संयोजिका निर्मला सिंघवी, कन्या मंडल, किशोर मंडल व तेरापंथ समाज सक्रिय रहा। आयोजन में तेरापंथी सभा, युवक परिषद् एवं महिला मण्डल - मुलुंड प्रवास व्यवस्था समिति मुंबई अध्यक्ष मदनलाल तातेड के साथ टीम एवं सभी संघीय संस्थाये सक्रिय रही।

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