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कोर्ट से भी अतिक्रमियों को नहीं मिली राहत
By EditorialPublished on
देहलीगेट चौराहे पर अवैध रूप से मंदिर की आड़ में कब्जा कर लम्बे समय से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों के अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करने के खिलाफ न्यायालय में पेश अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया।

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उदयपुर. नगर संवाददाता | देहलीगेट चौराहे पर अवैध रूप से मंदिर की आड़ में कब्जा कर लम्बे समय से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों के अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करने के खिलाफ न्यायालय में पेश अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया।
शहर के सीविल न्यायालय (Civil Court) उत्तर में गणपति ज्यूस सेंटर के मालिक सुंदरलाल पुत्र डालचंद साहू निवासी प्रतापनगर, मुन्नालाल पान विक्रेता राजेश पुत्र राखीलाल तम्बोली निवासी भूपालपुरा, त्रिवेणी पान विक्रेता के भंवरलाल पुत्र उदयलाल निवासी उत्तरी सुंदरवास और रिको वॉच सर्विस के भोपाल सिंह पुत्र रूपलाल कोठारी निवासी भूपालपुरा ने अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा एवं स्थाई निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र किया, जिसमें बताया कि देहलीगेट चौराहे पर पूर्वजों के समय से व्यवसायरत है। उन्होंने दुकानें महंत रामदास वैष्णव व उनके चेले ओमप्रकाश वैष्णव से किराए पर ली थी सुंदरलाल 46, राजेश 82, भंवरलाल व भोपाल सिंह ने 47-47 वर्ष से दुकानों पर काबिज किरायेदार होकर व्यवसायरत होना बताया। उन्होंने बताया कि हमारा व्यवसाय और हमारी दुकानें सड़क सीमा व नाली के अंदर है। हमारे द्वारा किसी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है और हमारे व्यवसाय से यातायात प्रभावित नहीं हो रहा है। नगर निगम अतिक्रमण हटाने के नाम पर हमें बरसों से चल रहे व्यवसाय से बेदखल करने पर आमदा है। अंतरिम निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधिवक्ता भूपेंद्र जैन एवं शत्रुध्न सिंह ने बहस के दौरान तर्क रखा कि निगम द्वारा नियमानुसार अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर कार्यवाही की जा रही है। व्यापारियों द्वारा नगर निगम के समक्ष कोई भी उचित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे प्रार्थी का कोई प्रथम दृष्टया मामला ही नहीं बनता है। अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र अस्वीकार कर खारिज करने का आग्रह किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पीठासीन अधिकारी भरत पूनिया ने फैसले में लिखा कि पत्रावली एवं उसमें संलग्न दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद सुसंगत विधि का परिशीलन किया गया। बहस के दौरान नगर निगम की ओर से अवैध अतिक्रमण के विरूद्ध कार्यवाही की जा चुकी है एवं अब कोई कार्यवाही शेष नहीं है। दौराने बहस अधिवक्ता द्वारा स्वीकृति देते हुए यह कथन किया कि नगर निगम द्वारा उनके खिलाफ कार्यवाही की गई है। व्यापारियों द्वारा पेश किए गए प्रार्थना पत्र में ऐसे कोई सुदृढ़ दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिससे कि प्रथम दृष्टया मामला उनके पक्ष में बनता हो। चूंकि हाल ही में यह एक स्वीकृत तथ्य है कि नगर निगम द्वारा कार्यवाही अमल में लाई जा चुकी है, जिससे कि इस स्तर पर किसी तरह की अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा दिया जाना न्यायोचित नहीं है। अतः उपरोक्त चारों व्यापारियों के अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई कर अस्वीकार कर दिए ।

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