eaknath shinde
मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। कांग्रेस (Congress) नेता मिलिंद देवड़ा (milind deora) का शिवसेना (shivsena) में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eaknath Shinde) ने कहा कि मिलिंद के रूप में जानकार, समझदार और संयमी नेता हमें मिला है। यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर तो अभी बाकी है। इस मौके पर शिवसेना सांसद राहुल शेवाले, गजानन कीर्तिकर भी मौजूद थे। शिंदे ने कहा कि पिछले 50 साल से देवड़ा परिवार का कांग्रेस से रिश्ता था, लेकिन कई बार साहसी फैसले लेने पड़ते हैं। कुछ ऑपरेशन इस तरह से करने पड़ते हैं कि सुई भी न चुभे, टांका भी न लगे और ऑपरेशन हो जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं तो डॉक्टर भी नहीं हूं, लेकिन डेढ़ साल पहले मैंने भी एक ऑपरेशन किया था। मैं आरोप प्रत्यारोप नहीं करता, न मैं उसकी चिंता करता हूं। मैं सिर्फ अपना काम करता हूं। आजकल मैं सुबह उठकर सड़कें धोता हूं। बीएमसी कमिश्नर भी मेरे साथ होते हैं। मुख्यमंत्री ने देवड़ा का शिवसेना में स्वागत करते हुए कहा कि वह अपनी धर्मपत्नी के साथ आए हैं, उनका भी स्वागत है। सफल पुरूष के किसी भी निर्णय के पीछे एक महिला की ताकत होती है। डेढ़ साल पहले निर्णय लेते समय मेरे मन में भी वही भावनाएं थीं। एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब मैंने यह फैसला लिया, तो मैंने श्रीकांत शिंदे की मां को विश्वास में लिया।
बाप्पा के दरबार में देवड़ा
मिलिंद ने सुबह सिद्धिविनायक मंदिर जाकर दर्शन किए। उनके साथ पत्नी पूजा देवड़ा और शिंदे गुट (Shinde group) के विधायक सदा सरवणकर भी थे। इसके बाद उन्होंने दक्षिण मुंबई में स्थापित बालासाहेब ठाकरे की प्रतिमा का अभिवादन किया।
इन्होंने भी छोड़ी कांग्रेस
मिलिंद के साथ कांग्रेस का साथ छोड़ने वालों में कुछ पूर्व नगरसेवक, दक्षिण मुंबई के कांग्रेस के कई पदाधिकारी, उनसे जुड़े व्यापारिक संगठनों के लोग भी शामिल हैं। इनमें महाराट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुशीबेन शाह, पूर्व नगरसेवक सुनील नरसाले, प्रमोद मांद्रेकर, राम बच्चन मुरारी, हंसा मारू, अनिता यादव, रमेश यादव, प्रकाश राउत, मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष ऐडवोकेट सुशील व्यास, पूनम कनौजिया, डायमंड व्यापारी संजय शाह, दिलीप साकेरिया, सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टी राजाराम देशमुख, प्रशांत झवेरी, समर्थलाल मेहता, सौरव शेट्टी, एडवोकेट त्यंबक तिवारी, कांती मेहता, उदेश अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल, कैलाश मुरारका, मुरारजी मोतीचंद शामिल हैं, जो जिन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद शिवसेना में प्रवेश किया।
Editorial

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