Acharya Mahashraman
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने अपनी धवल सेना के साथ रविवार को मुलुण्ड (Mulund) प्रवेश किया। उन्हें अपने आंगन में देख मुलुण्ड की जनता उल्लास से सराबोर हो उठी। मार्गों में बने तोरण द्वार, होर्डिंग्स, झांकियां उनके उल्लास को प्रदर्शित कर रहे थे।आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री मुलुण्ड (पश्चिम) स्थित मुम्बई पब्लिक स्कूल पहुँचे।
इसके पूर्व उन्होंने भाण्डुप से प्रस्थान किया। मार्ग में उपस्थित जनता को आशीर्वाद प्रदान करते हुए वे मुलुण्ड की ओर गतिमान थे। मुलुण्ड की सीमा में प्रवेश करते ही पूरा वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा। स्वागत जुलूस के साथ वे प्रवास स्थल पहुँचे

Acharya MahashramanPratahkal-Acharya Mahashraman-Mulund
आयोजन स्थल कालीदास नाट्यमंदिर में उन्होंने कहा कि सभी प्राणी दुःख से डरते हैं। दुःख, कष्ट प्राणी के जीवन में उसके द्वारा अज्ञानतावश किए गए प्रमाद के कारण ही प्राप्त होता है। इस संसार में जन्म, बुढ़ापा, रोग और मृत्यु भी दुःख है। शास्त्र में सभी प्रकार के दुःखों से मुक्त होने का मार्ग बताया गया कि प्राणी स्वयं पर अनुशासन करे तो उसे सर्व दुःख से मुक्ति की प्राप्ति हो सकती है। इसके लिए आदमी को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए। कटु बोलना, झूठ बोलना, किसी पर मिथ्या आरोप लगाना वाणी का असंयम है। इसी प्रकार आदमी को अपने मन का निग्रह करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी चिन्तन से भी दुःखी बन सकता है। आदमी का चिन्तन अच्छा हो तो वह दुःखों से बच सकता है। कोई कठिनाई आ भी जाए तो आदमी को समता-शांति में रहने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यहां आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ भी पधारे थे, आज मेरा भी आना हो गया। यहां की जनता में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की चेतना रहे। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने भी उद्बोधित किया। स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष चुन्नीलाल सिंघवी ने अभिव्यक्ति दी। महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया।
Editorial

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