Vasundhara remained missing from the third consecutive major event of BJP
जयपुर ( कार्यालय संवाददाता ) । राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा भले ही एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन पार्टी में अंदरूनी खींचतान साफ नजर आ रही है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजधानी जयपुर में शुक्रवार को पार्टी की पहली बड़ी बैठक आयोजित हुई। लेकिन विधानसभा में जीत के बाद यह पार्टी का तीसरा ऐसा महत्वपूर्ण आयोजन रहा, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दूरी बना कर रखी पार्टी सूत्रों ने बताया कि उन्हें बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह नहीं आई। राजे के नहीं आने पर दिनभर सियासी गलियारों में पार्टी में खेमेबंदी की चर्चाएं चलती रहीं । दरअसल, प्रदेश में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने संबंधी विधायक दल की बैठक में अंतिम बार राजे पार्टी मुख्यालय पहुंची थीं। इसके बाद 30 दिसंबर को राजभवन में मंत्रिमंडल विस्तार का कार्यक्रम था, लेकिन राजे यहां नहीं पहुंचीं। इसके बाद 5 जनवरी को प्रदेश भाजपा के लिए सबसे बड़ा आयोजन था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयपुर में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ चर्चा की। लेकिन विधायक के तौर पर निर्वाचित होने के बावजूद वसुंधरा इस बैठक में नहीं आई। बताया गया कि वह पारिवारिक काम से बाहर गई हैं। पार्टी की ओर से शुक्रवार की बैठक को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण बताया गया। प्रदेश प्रभारी अरूण सिंह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह, अर्जुनराम मेघवाल, छत्तीसगढ़ प्रभारी ओम माथुर समेत पार्टी और संगठन के कई वरिष्ठ नेता इस बैठक में मौजूद रहे।
हारी सीटों पर होगा फोकस
शुक्रवार की बैठक में पार्टी नेताओं ने प्रदेश की सभी 25 सीटों पर जीत के लिए मंथन किया। खासतौर पर उन सीटों पर फोकस किया गया, जिन पर विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। बीते दो लोकसभा चुनाव और मौजूदा विधानसभा चुनाव के मत प्रतिशत को लेकर बूथ लेवल तक की चर्चा की गई। इसके अलावा बैठक में 22 जनवरी को राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं की अयोध्या रवानगी की तैयारियों को भी देखा गया।
Editorial

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