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गहलोत - पायलट गुट में नेता प्रतिपक्ष को लेकर ठनी
By EditorialPublished on
जयपुर ( कार्यालय संवाददाता)। विधानसभा सत्र शुरू होने में महज सप्ताह भर का समय बचा है, लेकिन अभी तक कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर फैसला नहीं हो पाया है। अंदरूनी खींचतान के चलते कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर तीन धड़े बन गए हैं।

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जयपुर ( कार्यालय संवाददाता)। विधानसभा सत्र शुरू होने में महज सप्ताह भर का समय बचा है, लेकिन अभी तक कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर फैसला नहीं हो पाया है। अंदरूनी खींचतान के चलते कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर तीन धड़े बन गए हैं।
तीनों ही अलग-अलग नाम आलाकमान को सुझा रहे हैं। एक तरफ सचिन पायलट खेमा है तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत । गहलोत जिस नाम से सहमत नहीं, पायलट गुट उसी के लिए पैरवी करने में जुटा है। तीसरा खेमा उन नेताओं का है जो दिल्ली की सियासत में भी दखल रखता है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहती, इसलिए दलित-आदिवासी कार्ड और जाट- ब्राह्मण कॉम्बिनेशन में से एक चुनने पर मंथन कर रही है। फिलहाल कौनसा धड़ा किस फॉर्मूले पर किसको आगे कर रहा है।
नेता प्रतिपक्ष के 5 मुख्य दावेदार
कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के लिए फिलहाल महेंद्रजीत मालवीय, गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी, हरिमोहन शर्मा, टीकाराम जूली के नाम प्रमुख दावेदारों के तौर पर चल रहे हैं। आलाकमान चाहता है कि प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पद के चुनाव में दलित-आदिवासी कार्ड के साथ जाट - ब्राह्मण, जाट- दलित का कॉम्बिनेशन बने ।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आदिवासी-एसटी वोटर्स में मैसेज के लिए महेंद्रजीत मालवीय की पुरजोर पैरवी कर रहे हैं। लेकिन मालवीय के नाम पर पायलट खेमा और दूसरे नेता तैयार नहीं हैं।
आलाकमान के करीब मानें जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह सहित एक खेमा गहलोत सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहे और अब अलवर ग्रामीण से विधायक टीकाराम जूली की पैरवी कर रहे हैं। जूली पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में माने जाते हैं। जूली का नाम नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने की स्थिति में उपनेता प्रतिपक्ष विकल्प के लिए भी सुझाया गया है।
जाट चेहरों में डोटासरा - हरीश चौधरी, लेकिन एक धड़ा सहमत नहीं
नेता प्रतिपक्ष के लिए जाट दावेदारों में पहला नाम कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का चल रहा है । डोटासरा विपक्ष में रहते वक्त कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रहे थे, तब विधानसभा में उनकी तैयारी और सरकार को घेरने के तेवर चर्चित रहे थे ।
अब प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर लंबी पारी की कम संभावनाएं देखकर डोटासरा की दावेदारी नेता प्रतिपक्ष के लिए चल रही है। अगर डोटासरा को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता है तो प्रदेशाध्यक्ष के पद पर गैर जाट नेता को मौका दिया जाएगा। फिलहाल इस फॉर्मूले पर चर्चा ही हो रही है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है।
दूसरे जाट चेहरे के तौर पर हरीश चौधरी भी नेता प्रतिपक्ष के लिए दावेदार माने जा रहे हैं, एआईसीसी में एक लॉबी उनके पक्ष में है, लेकिन उनके नाम पर अशोक गहलोत सहमत नहीं हैं। हालांकि सचिन पायलट खेमा हरीश चौधरी के समर्थन में है। हालांकि उनके नाम पर भी अभी फाइनल सहमति नहीं बन पाई है।
ब्राह्मण चेहरे की भी चर्चा, पारीक-शर्मा रेस में
पार्टी में नेता प्रतिपक्ष या प्रदेशाध्यक्ष में से एक पद ब्राह्मण चेहरे को देने पर भी सुझाव दिया गया है। एक खेमा ब्राह्मण चेहरे के तौर पर वरिष्ठ विधायक हरिमोहन शर्मा, राजेंद्र पारीक के नाम भी आगे बढ़ा रहा है। कांग्रेस में जाट- ब्राह्मण, जाट-दलित, जाट-आदिवासी कॉम्बिनेशन के फॉर्मूले पर काम होता रहा है। प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पदों में जाट-ब्राह्मण कॉम्बिनेशन पहले भी चलता रहा है।
पहले ब्राह्मण को नेता प्रतिपक्ष और जाट को प्रदेशाध्यक्ष या फिर जाट नेता प्रतिपक्ष होने पर ब्राह्मण चेहरे को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाता रहा है। जब बीडी कल्ला (ब्राह्मण) नेता प्रतिपक्ष थे तब नारायण सिंह (जाट) कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जाट-ब्राह्मण कॉम्बिनेशन था। इसके बाद रामनारायण चौधरी नेता प्रतिपक्ष बने तो बीडी कल्ला प्रदेशाध्यक्ष पद पर आए।
जनवरी में ही होता रहा है नेता प्रतिपक्ष का फैसला
नई सरकार बनने के बाद आम तौर पर जनवरी में नेता प्रतिपक्ष बनते आए हैं। पिछली बार कांग्रेस ने 20 जनवरी 2014 को रामेश्वर डूडी को नेता प्रतिपक्ष बनाया था। वसुंधरा राजे की पहली सरकार के समय बीडी कल्ला को 16 जनवरी 2004 को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। इससे पहले भैरोंसिंह शेखावत की अगुवाई वाली सरकार के समय 31 दिसंबर 1993 को परसराम मदेरणा नेता प्रतिपक्ष बने थे।
वहीं, भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष जनवरी में ही तय किए। पिछली गहलोत सरकार के समय 13 जनवरी 2019 को गुलाबचंद कटारिया को विधानसभा सत्र से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया था। गहलोत की अगुवाई वाली दूसरी सरकार के समय भाजपा ने वसुंधरा राजे को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी 2 जनवरी 2009 को दी थी। पहली गहलोत सरकार के समय 8 जनवरी 1999 को भैरोंसिंह शेखावत नेता प्रतिपक्ष नियुक्त हुए थे।

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