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भुसावर (प्रा.सं.)। उपखंड के गांव गढ़ी ब्राह्मण से लेकर सुक्कू के नगला तक करीब एक किलोमीटर की दूरी में बनाई जा रही सड़क (Road) के दौरान पीडब्ल्यूडी (PWD) के अधिकारियों की मनमानी एवं तानाशाही के चलते किसानों द्वारा इस महंगाई के दौर में अपना खून पसीना एक कर उगाए गए कीमती लकड़ी नीम और शीशम के हरे पेड़ तथा बाजरे की पकी पकाई हरी फसल को नष्ट कर दिया हैए जिससे पीड़ित किसानों में भारी रोष व्याप्त हैं। ग्राम पंचायत गोगैरा के पूर्व वार्ड पंच एवं गांव सुक्कू का नगला निवासी बलराम शर्मा ने बताया की सुक्कू के नगला से लेकर वन विभाग की ओर जाने वाले रास्ते में जिसमे होकर सड़क का निर्माण कराया जा रहा है ए वह करीब 25 से 60 फीट चौड़ाई का गैर मुमकिन रास्ता राजस्व रिकोर्ड में दर्ज है, लेकिन कुछ दबंग लोगो ने रास्ते की जमीन को पहले से ही काट कर अपने खेतों मिला लिया है, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और ठेकेदार दबंगों के भय से रास्ते की भूमि को छोड़कर गरीबों की खातेदारी की भूमि में होकर हरी भरी फसल को नष्ट कर जबरन सड़क बना रहे हैं जिससे उनके खेतों में खड़े दर्जनों नीम, शीशम के हरे पेड़ और बाजरे की फसल को नष्ट कर दिया है जिससे उन्हें हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है बलराम ने अधिकारियों पर मनमानी एवं तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा की सरकार ने ना तो हमारी खातेदारी की जमीन को सड़क निर्माण के लिए एक्वायर किया और ना ही उन्हें भूमि अधिग्रहण करने को लेकर कोई नोटिस दिया गया है और ना ही गैर मुमकिन रास्ते की जमीन की पैमाइस कराई गई हैए जिससे उनके खेतों में रास्ते की भूमि मिले होने का आरोप भी उन पर नहीं लगाया जा सकता ।
इसी प्रकार गांव मैनापुरा निवासी गोमती देवी ने बताया की उनके खेतों के सामने जिन दबंगों के खेत है उन्होंने रस्ते की जमीन को वर्षो पहले से ही अपने खेतों में मिला रखा है। इसलिए जैसे ही एक तरफ से सड़क निर्माण शुरू कर मेरे खेत पर आकर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने निशानदेही की तो मैंने मेरे खेत में होकर सड़क बनाने का यह कहते हुए विरोध किया की पहले आप जो गैर मुमकिन रास्ता है। उसकी पैमाइस कराए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, लेकिन दबंगों के आगे गरीब की कौन सुनता है। उन्होंने मुझे लताड़ कर भगा दिया। इसके पश्चात मैंने उच्च अधिकारियों से रास्ते की पैमाइस कराने के उपरांत ही सड़क बनाने की मांग कीए लेकिन बात बनती नहीं दिखी तो मैंने परेशान होकर न्यायालय की शरण ली, लेकिन अदालत के आदेशों की अवेहलना करते हुए पीडब्ल्यूडी के तानाशाह अधिकारियों ने बिना किसी विधिवत पैमाईस कराए मेरे खेत की डोर मेड को तोड़ते हुए बाजरे की फसल को नष्ट कर सड़क निकालने का कार्य शुरू कर दिया है जिससे मुझे मानसिक प्रताड़ना के साथ-साथ हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। गोमती देवी ने बताया की अब वे अधिकारियों की मनमानी को लेकर पुनः न्यायालय की शरण में जायेगी।
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