लोहार्गल श्री मालकेतु की 24 कोसीय परिक्रमा ठाकुरजी की पालकी की अगुवाई में आज से शुरू
उदयपुरवाटी (प्रा.सं.)। तीर्थ स्थल लोहार्गल (Pilgrimage Center Lohargal) के श्री मालकेतु (Mr. Malketu) की 24 कोसीय परिक्रमा (Kosian rotation), 8 सितम्बर से शुरू हो रही है। इसका समापन शुक्रवार, 15 सितम्बर (द्वितीय अमावस्या) को होगा। इस बार अमावस्या दो

उदयपुरवाटी (प्रा.सं.)। तीर्थ स्थल लोहार्गल (Pilgrimage Center Lohargal) के श्री मालकेतु (Mr. Malketu) की 24 कोसीय परिक्रमा (Kosian rotation), 8 सितम्बर से शुरू हो रही है। इसका समापन शुक्रवार, 15 सितम्बर (द्वितीय अमावस्या) को होगा। इस बार अमावस्या दो होने से लोहार्गल मालकेतु परिक्रमा 8 दिन की होगी। परिक्रमा पूर्ण होने के दौरान चर्तुदशी व अमावस्या का मेला लगता है। इस बार अमावस्या दो होने से मेला एक दिन अधिक भी लग सकता है। सदियों से चल रही इस लोहार्गल मालकेतु का शुभारंभ चतुर्थ सम्प्रदाय (खाकी अखाड़ा) के महाराज व साधु-संतों की टोली ठाकुरजी की पालकी की अगुवाई से आरंभ करते हैं।
गोगा नवमी से दो पहर बाद नृसिंह मंदिर (खाकीजी का मंदिर) (Narasimha Temple (Temple of Khakiji)) से ठाकुरजी पालकी को सूर्य कुंड पर ले जाया जायेगा और वहां स्नान-ध्यान के बाद गोमुख विष्णु मंदिर पर ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद चतुर्थ सम्प्रदाय के घनदास महाराज के नेतृत्व में झालर, शंख, झांझ, मंजीरा आदि बजाते हुए, ठाकुरजी की पालकी पर चँवर ढालते हुए साधु-संतों की मंडली व परिक्रमार्थियों के साथ ठाकुरजी की पालकी जयकारे के साथ परिक्रमा पथ पर रवाना होती है।
परिक्रमा के क्रमश: पड़ाव इस प्रकार हैं: किरोड़ी, शाकम्भरी, नागकुंड, टपकेश्वर महादेव, शोभावती व खोरी कुंड। वापसी सूर्य कुंड गोमुख तक पहुंचने पर मालकेतु की 24 कोसीय परिक्रमा पूर्ण हो जाती है।

