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इंडिया नहीं, भारत के राष्ट्रपति
By EditorialPublished on
संसद (Sansad) के विशेष सत्र (Special Session) के बुलावे के बाद से राजनैतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। मोदी सरकार (Modi Sarkar) एक देश-एक चुनाव (One country - one election) के लिए पैनल की घोषणा कर चुकी है। विपक्ष (opposition party) इस मुद्दे को लेकर पहले से हमलावर है।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। संसद (Sansad) के विशेष सत्र (Special Session) के बुलावे के बाद से राजनैतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। मोदी सरकार (Modi Sarkar) एक देश-एक चुनाव (One country - one election) के लिए पैनल की घोषणा कर चुकी है। विपक्ष (opposition party) इस मुद्दे को लेकर पहले से हमलावर है।
अब चर्चा इस पर तेज हो गई है कि सरकार ने संविधान में बड़ा बदलाव करके देश का ही नाम बदल दिया है। कांग्रेस (Congress) का आरोप है कि सरकार संविधान से इंडिया हटाकर भारत (Bharat) कर चुकी है। जयराम रमेश (Jairam ramesh) ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने संविधान से इंडिया नाम हटा दिया है। राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) की ओर से जी -20 (G-20) डिनर के लिए आमंत्रण में मेजबान के तौर पर प्रेसिडेंड ऑफ इंडिया (President of India) की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत (President of Bharat) लिखा है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के खिलाफ है। संसद के विशेष सत्र शुरू होने में 13 दिन से भी कम का वक्त बचा है। जैसे-जैसे संसद का विशेष सत्र नजदीक आ रहा है। ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार एक देश-एक चुनाव के अलावा महिला आरक्षण बिल (Womens Reservation Bill) भी ला सकती है। विपक्ष में यह भी चर्चा है कि सरकार संविधान में बड़े बदलाव कर सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार संविधान से इंडिया शब्द को हटाना चाहती है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, क्या ये खबर वाकई सच है ! राष्ट्रपति भवन ने 9 सितंबर को जी-20 डिनर आयोजित किया है, इसमें प्रेसिडेंड ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंड ऑफ भारत लिखा गया है। अब संविधान के आर्टिकल को ऐसे पढ़ा जा सकता है भारत, जो इंडिया था राज्यों का संघ है। अब तो राज्यों के समूह पर भी खतरा है।
उठ रही मांग- हटे इंडिया नाम
भाजपा (BJP) नेताओं में भी इंडिया नाम हटाने को लेकर मांग की जा रही है। भाजपा सांसद हरनाथ यादव (Harnath Yadav) ने भी मांग की है कि संविधान से इंडिया नाम हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत नाम से हमे जो ऊर्जा मिलती है,वो इंडिया नाम से नहीं। भारत नाम हमारे दिल में बसा है। असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने भी ट्वीट किया, उन्होंने लिखा, प्रेसिडेंड ऑफ भारत ! खुशी और गर्व है कि हमारी सभ्यता साहसपूर्वक अमृत काल की ओर आगे बढ़ रही है। इंडिया नाम हटाने की मांग आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagvat) ने भी की है। यूपी (UP) के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक (Deputy CM Brijesh Pathak) ने भी मांग की है कि इंडिया नाम हटाकर भारत कर देना चाहिए। उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि प्र.म. नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) इतिहास को विकृत करना जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया जो कि भारत है, वह राज्यों का संघ है। हम विचलित नहीं होंगे। जयराम रमेश ने इस पोस्ट में आगे कहा कि आखिरकार, इंडिया में शामिल दलों का क्या उद्देश्य है ? यह भारत है- सद्भाव, मैत्री, मेल-मिलाप और विश्वास लाएं। उन्होंने आगे कहा- जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया ! कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्र.म. नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया (MAKE IN INDIA), स्किल इंडिया (SKILL INDIA), खेलो इंडिया (KHELO INDIA) जैसे नाम दिए हैं। अब वो इंडिया शब्द से डरे हुए हैं।
भाजपा ने पूछा- आपकोशर्म क्यों आ रही है?
जयराम रमेश के दावे पर भाजपा के महासचिव तरूण चुग ने कहा कि भारत कहने या लिखने में दिक्कत क्यों है? आप शर्म क्यों महसूस कर रहे हैं, जयराम रमेश ? हमारे राष्ट्र को प्राचीन काल से ही भारत कहा जाता रहा है और इसका उल्लेख हमारे संविधान में भी किया गया है। वे बिना वजह गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
संविधान में क्या
भारत के संविधान के अनुच्छेद 1 में 'संघ का नाम और राज्यक्षेत्र का जिक्र है। इसमें कहा गया है, 'भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा। साथ ही लिखा गया है, 'राज्य और उसके राज्यक्षेत्र वे होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं।
कहां से उठी चर्चा
तीन दिन पहले ही असम (Assam) के गुवाहाटी (Guwahati) में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 'भारत और 'इंडिया का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था, हम सभी को इंडिया शब्द का इस्तेमाल छोड़कर भारत का उपयोग करना चाहिए। हमारे देश का नाम सदियों से भारत है। भाषा कोई भी हो नाम एक ही रहना चाहिए। हालांकि, मांग का सिलसिला यहां से शुरू नहीं हुआ। मॉनसून सत्र के दौरान भी भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने संविधान से 'इंडिया शब्द हटाने की मांग की थी। उनका कहना है कि यह औपनिवेशिक गुलामी को दिखाती है। बाद में भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने भी संविधान में संशोधन की मांग उठाई और 'इंडिया के स्थान पर 'भारत लाने की बात कही।
क्या बदल सकता है नाम?
सरकार ने 18 सितंबर से पांच दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाया है। अब अटकलें है कि इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक भी पेश किया जा सकता है, जिसके जरिए इस बदलाव को प्रभाव में लाया जा सके। हालांकि, सरकार की ओर से विशेष सत्र के एजेंडा को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा एक देश एक चुनाव बिल भी पेश हो सकता है।
नाम का किस्सा
भारत शायद दुनिया का एकमात्र देश होगा, जिसके कई नाम हैं। इनमें इंडिया (India), भारत (Bharat), हिंद (Hind), हिन्दुस्तान (Hindustan) और जंबू द्वीप (Jambu island) शामिल हैं। हालांकि, आमतौर पर सिर्फ इंडिया और भारत का इस्तेमाल होता है। खास बात है कि यह कि देश की पहचान भाषा के आधार पर बदल जाती है। उदाहरण के तौर पर अंग्रेजी भाषा में बातचीत या लिखने में 'इंडिया का इस्तेमाल होता है। जबकि, हिंदी के उपयोग में 'भारत का जिक्र किया जाता है। सबसे शुरूआती सभ्यताओं में सिंधु घाटी का नाम आता है। अब सिंधु नदी के पास भारतीय सभ्यता शुरू होने के चलते देश को 'इंडिया नाम मिला।
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