Udaipur schoolchild suicide
प्रातः काल संवाददाता उदयपुर। जिले के सायरा था क्षेत्र में एक स्कूली बच्चे द्वारा तालाब में कूदकर आत्महत्या करने के मामले में मृतक के परिजनों ने स्कूल प्रधानाचार्या और एक अन्य के खिलाफ बच्चे को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करवाया है।
दो बच्चे के झगड़े के चलते और प्रधानाचार्या द्वारा धमकाने से आहत होकर बच्चे ने आत्महत्या की थी । इधर शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर प्रधानाचार्य को एपीओ कर दिया है। पुलिस के अनुसार जलेन्द्र ( 14 ) पुत्र अर्जुनलाल नंगारची निवासी तरपाल जो गांव में ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई करता था। इस बच्चे ने गांव के बाहर तालाब में कूदकर आत्महत्या कर ली। बच्चे के घर पर नहीं आने पर परिजनों ने उसे तलाशा तो उसका शर्ट व चप्पल तालाव के बाहर पड़े मिले। इस पर तालाब में ग्रामीणों ने तलाशा को इसका शव मिला। जिसे मोर्चरी में रखवाया गया। बच्चे के पिता अर्जन पुत्र शंकरलाल नंगारची निवासी तरपाल सायरा ने मामला दर्ज करवाया कि उसका लडका जलेन्दर राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय तरपाल में 9वीं कक्षा में पढ़ता था । 26 सितम्बर को विद्यालय गया था। दिन में किसी बात को लेकर जलेन्दर के कक्षा में बच्चों के साथ विवाद हो गया, जिस पर विद्यालय की प्रिंसिपल सुन्दर सालवी ने 27 सितम्बर को फोन कर बुलाया, जिस पर उसकी पत्नी कंचन व पुत्री भारती विद्यालय गई।
जहां पर प्रिंसिपल ने पत्नी कंचन व पुत्री भारती के सामने जलेन्द्र को डराया धमकाकर दो-ढाई लाख रुपये की मांगे और विद्यालय से टीसी ले जाने की धमकी दी। साथ ही खाली कागज पर हस्ताक्षर करवाए। उसके पुत्र जलेन्दर ने माफी मांगी, जिसे समझा कर उसकी पत्नी व पुत्री अपने घर आ गई। उसका लड़का विद्यालय में ही था। प्रिंसिपल के प्रताडित करने के कारण जलेन्दर विद्यालय की छुट्टी होने के बाद घर पर नही आया तो तलाशना शुरू कर दिया। शाम चार बजे बाद पता चला कि गांव से बाहर बुजरा तालाब के बाहर जलेन्दर शर्ट व जूते पड़े थे, जिसमें से जलेन्दर का शव निकला। पिता ने विद्यालय की प्रिंसिपल सुंदर सालवी के खिलाफ पैसो की मांग करने जिससे आहत होकर उसके बच्चे द्वारा आत्महत्या करने का मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने प्रिंसिपल के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवा परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इधर मामले के तूल पकड़ने पर शिक्षा विभाग ने प्रधानाचार्या को एपीओ कर दिया।
Editorial

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