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जयपुर। मुख्यमंत्री अषोक गहलोत (CM Ashok gehlot) ने कहा कि राज्य सरकार फसल खराबे से प्रभावित किसानों के प्रति संवेदनशील है। उन्हें राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कई जिलों में असामान्य वर्षा से फसलों को लगातार नुकसान हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए गहलोत ने गिरदावरी आगामी 10 दिवस के भीतर करवाकर किसानों को राहत देने के निर्देश दिए हैं।
गहलोत बुधवार शाम को मुख्यमंत्री निवास पर फसल नुकसान, इनपुट सब्सिडी (Input subsidy), फसल बीमा (crop insurance) एवं गिरदावरी की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फसल खराबे का आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने के लिए गिरदावरी का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की गिरदावरी अविलम्ब करवाकर फसलों के नुकसान की रिपोर्ट भिजवाने के भी निर्देश दिए, ताकि प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध करवाई जा सके ।
गुलाबी सुण्डी कीट के प्रकोप से प्रभावित किसानों को मिलेगी राहत
बैठक में बताया गया कि हनुमानगढ़ (Hanumangaeh), गंगानगर (Ganganahar) जिलें में कपास की फसल में गुलाबी सुण्डी कीट (pink caterpillar) के प्रकोप से दोनों जिलों में 2 लाख 56 हजार हैक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिससे 73 हजार कृषक प्रभावित है। जिनमें 5 से 45 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। फसल बीमा योजना के अन्तर्गत कीट रोग के प्रकोप के कारण कपास फसल का उत्पादन प्रभावित होने पर बीमित किसानों को नुकसान हेतु क्लेम देय है। वर्तमान में खरीफ 2023 के कपास की फसल कटाई प्रयोग प्रक्रियाधीन है। इन प्रयोगों से प्राप्त औसत उपज आंकड़ों के आधार पर नियमानुसार क्लेम दिया जाएगा।
पात्र काश्तकारों को कृषि आदान अनुदान का हो रहा तत्काल भुगतान
बैठक में बताया गया कि एसडीआरएफ नॉर्म्स के अनुसार काश्तकारों को कृषि आदान अनुदान राशि के भुगतान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Crop Insurance Scheme) के अन्तर्गत बीमा क्लेम राशि के समायोजन के प्रावधान के कारण काफी विलम्ब हो रहा था । मुख्यमंत्री के आग्रह पर भारत सरकार ने 11 जुलाई 2023 को एसडीआरएफ नॉर्म्स में संशोधन कर उक्त प्रावधान को समाप्त कर दिया । संशोधित नॉर्म्स के अनुसार अधिकतम किसानों को कृषि आदान- अनुदान का भुगतान किया जा चुका है। गहलोत ने कहा कि शेष किसानों को भी जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
Editorial

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