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राजस्थान में भी केंद्रीय मंत्री -सांसदों को उतार सकती है भाजपा
By EditorialPublished on
नई दिल्ली (एजेंसी)। राजस्थान (Rajasthan) में अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Govt.) को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए भाजपा (BJP) लगातार मेहनत कर रही है। अब खबर ये हैं कि मप्र की तरफ राजस्थान में भी भाजपा अपने कई केंद्रीय नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़वा सकती है। बीजपी सूत्रों की मानें तो भाजपा ऐसा इसलिए भी कर रही है ताकि यह दिखाया जा सके कि वो एकजुट होकर लड़ रहे हैं, उनमें कोई मतभेद नहीं और आगामी लोकसभा चुनाव में नए चेहरे संसद भेजे जा सकें।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। राजस्थान (Rajasthan) में अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Govt.) को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए भाजपा (BJP) लगातार मेहनत कर रही है। अब खबर ये हैं कि मप्र की तरफ राजस्थान में भी भाजपा अपने कई केंद्रीय नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़वा सकती है। बीजपी सूत्रों की मानें तो भाजपा ऐसा इसलिए भी कर रही है ताकि यह दिखाया जा सके कि वो एकजुट होकर लड़ रहे हैं, उनमें कोई मतभेद नहीं और आगामी लोकसभा चुनाव में नए चेहरे संसद भेजे जा सकें।
भाजपा (BJP) की रणनीति के बारे में बात करते हुए एक सूत्र ने बताया कि केंद्रीय नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारने का फैसला जीतने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सीट के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन नेताओं को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया जा सकता है, उनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत और अर्जुन राम मेघवाल जैसे नेताओं के अलावा राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिया कुमारी भी शामिल हैं।
कहा जा रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व आने वाले दिनों राजस्थान में अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर सकती है। मप्र और छत्तीसगढ़ की तरफ भाजपा तक राजस्थान में एक भी नाम का ऐलान किया है। राजस्थान में भाजपा को न सिर्फ कांग्रेस की तरफ चैलेंज बल्कि वसुंधरा राजे की तरफ से तेवरों का भी सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों ने बताया कि राजस्थान भाजपा स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों के नाम तय करने की दिशा में अंतिम निर्णय लेना जा रही है। इस लिस्ट को प्र.म. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की मीटिंग के बाद घोषित कर दिया जाएगा।
मप्र की दूसरी लिस्ट में भाजपा ने उतारे कई दिग्गज
सोमवार को मध्य प्रदेश के लिए जारी की गई दूसरी लिस्ट में भाजपा ने 3 केंद्रीय मंत्रियों, 4 सांसदों और एक नेशनल जनरल सेक्रेटरी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा साल 2018 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में बेहद कम अंतर हार गई थी। शिवराज सिंह चौहान करीब 18 सालों से राज्य में सीएम पद पर मौजूद हैं, ऐसे में भाजपा एंटी इनकंबेंसी फैक्टर और सीएम शिवराज के गायब होते जादू को लेकर आशंकित हैं।
राज्यवर्धन और दिया कुमारी को राजनीति में लाई थीं वसुंधरा
जिन नामों पर केंद्रीय नेतृत्व चर्चा करते हुए वसुंधरा राजे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राठौड़ और दिया कुमारी को खुद पूर्व सीएम वसुंधरा सियासत में लेकर आई थीं।
उन्होंने दावा किया कि इन दोनों के लिए ही बिना वसुंधरा की सपोर्ट के जीतना मुश्किल होगा। पूर्व सीएम ने गजेंद्र शेखावत को भी 2019 के चुनाव में अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत से पार पाने में मदद की। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा 2019 के बाद से हुए 9 में से 8 उपचुनाव हारी है। उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि राजस्थान अन्य राज्यों से अलग है और वोटर हिसाब मांगते हैं। हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो डिलीवर करें।
सांसदों व वरिष्ठ नेताओं के स्वजन को टिकट नहीं
कोर कमेटी के एक सदस्य ने बताया राष्ट्रीय नेतृत्व ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी सांसद अथवा वरिष्ठ नेता के स्वजन को टिकट नहीं दिया जाएगा। सांसद जसकौर मीणा अपनी पुत्री अर्चना को सवाईमाधोपुर, राहुल कस्वां अपने पिता रामसिंह को सादुलशहर से और विधायक सूर्यकांता व्यास अपने पुत्र को टिकट दिलवाना चाहते हैं।
स्वजन को चुनाव नहीं लड़वाने को लेकर यह तर्क है कि 2018 के चुनाव में भाजपा ने 15 सीटों पर नेताओं के वजन को टिकट दिया था, जिनमें से 3 ही जीत सके थे।
वसुंधरा को मैसेज देना चाहती है भाजपा
राजस्थान में केंद्रीय नेताओं को उतारकर भाजपा वसुंधरा राजे को भी यह संदेश देना चाहती है कि हो सकता है उन्हें सीएम फेस नहीं घोषित किया जाए। राज्य में सबसे लोकप्रिय भाजपा नेता के रूप में राजे की स्थिति को देखते हुए, पार्टी में एक वर्ग इस पर जोर दे रहा है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेताओं को उतारने की संभावना के बारे में बात करते हुए एक वसुंधरा राजे से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि पार्टी के लिए एक नया नेरेटिव बनाने में बहुत देर हो चुकी है। राजस्थान में वोटर्स का सेंटीमेंट अलग है।

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