Jaishankar addresses global polarization
न्यूयॉर्क (एजेंसी)। विदेश मंत्री एस जयशंकर (Foreign Minister S Jaishankar) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया आज बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत ने 20 के अध्यक्ष के तौर पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। यह समय हमारी उपलब्धियों और चुनौतियों का जायजा लेने का है। लेकिन कुछ देश अपने हिसाब से एजेंडा तय करने में लगे हैं। जयशंकर ने हरदीप सिंह निज्जर को लेकर कनाडा विवाद के बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि सियासी सहूलियत के हिसाब से आतंकवाद, चरमपंथ और हिंसा पर एक्शन नहीं लेना चाहिए। अपनी सहूलियत के हिसाब से क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं हो सकता। अभी भी कुछ देश ऐसे हैं, जो एक तय एजेंडे पर काम करते हैं लेकिन ऐसा हमेशा नहीं चल सकता और इसके खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए। जब वास्तविकता, बयानबाजी से कोसों दूर हो जाती है तो हमारे भीतर इसके खिलाफ आवाज उठाने का साहस होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत ने विभिन्न साझेदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। अब हम गुटनिरपेक्षता के युग से अब विश्व मित्र के रूप में विकसित हो गए है। यह क्वाड के विकास और ब्रिक्स समूह के विस्तार से झलकता है। ।
वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच कूटनीति और संवाद ही समाधान
जयशंकर ने कहा कि जी20 समिट (G20 Summit) ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया में ध्रुवीकरण के बीच कूटनीति और संवाद ही एकमात्र प्रभावी समाधान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के शब्दों में कहें तो दूरियों को कम करने, बाधाओं को हटाने और सहयोग का बीज बोने की जरूरत है।
दुनिया ने भारत की क्षमता को पहचाना
जयशंकर कहा कि भारत (India) अमृतकाल में प्रवेश कर गया है। हमें विश्वास है कि हमारी प्रतिभा को दुनिया ने पहचान लिया है। हमारा चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) चांद पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जब हमारा पड़ोसी मुल्क श्रीलंका आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था तब हम सबसे पहले मदद को आगे आए थे। दुनिया ने हमारे योगदान को सराहा भी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हम हमेशा से कानून आधारित व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। लेकिन अभी भी कुछ देश ऐसे हैं, जो एक तय एजेंडे पर काम करते हैं लेकिन ऐसा हमेशा नहीं चल सकता और इसके खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए। एक निष्पक्ष, समान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सभी को पालन करना चाहिए।
हमने 'विश्व मित्र' की अवधारणा विकसित की
जयशंकर ने कहा, गुट निरपेक्ष के युग से निकलकर अब हमने 'विश्व मित्र' की अवधारणा विकसित की है। एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य का भारत का दृष्टिकोण महज कुछ देशों के संकीर्ण हितों पर नहीं, बल्कि कई राष्ट्रों की प्रमुख चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किये जाने से संयुक्त राष्ट्र को भी सुरक्षा परिषद को समसामयिक बनाने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।
सभा को संबोधित करने से पहले जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस और महासभा के 78वें सत्र (78th session of the General Assembly) के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस से वैश्विक संगठन के मुख्यालय में सोमवार को मुलाकात की। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुला की और भारत की जी20 अध्यक्षता, क्षेत्रीय मामलों एवं वैश्विक चुनौतियों, सतत विकास लक्ष्यों और सुरक्षा परिषद में सुधारों को लेकर उनके साथ चर्चा की।
Editorial

Editorial

Next Story