✕
कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने 2018 के प्रत्याशियों से पूछा
By EditorialPublished on
कांग्रेस (Congress) के प्रदेश पर्यवेक्षकों ने उदयपुर (Udaipur) लोकसभा (Loksabha) में आने वाली विधानसभाओं में 2018 में प्रत्याशी रहे नेताओं से सवाल किया कि जब 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की लहर थी तो वे कैसे चुनाव हार गए और 2023 में उनके पास जीतने को लेकर क्या रणनीति है। इस पर वर्ष 2018 में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे अधिकांश के पास जवाब नहीं था और वे कुछ नही बता पाए।
_202309271142393289.jpg)
x
उदयपुर. नगर संवाददाता | कांग्रेस (Congress) के प्रदेश पर्यवेक्षकों ने उदयपुर (Udaipur) लोकसभा (Loksabha) में आने वाली विधानसभाओं में 2018 में प्रत्याशी रहे नेताओं से सवाल किया कि जब 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की लहर थी तो वे कैसे चुनाव हार गए और 2023 में उनके पास जीतने को लेकर क्या रणनीति है। इस पर वर्ष 2018 में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे अधिकांश के पास जवाब नहीं था और वे कुछ नही बता पाए।
विधानसभा चुनाव (Vidhansabha election) के लिए एआईसीसी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक मधुसुदन मिस्त्री, उदयपुर लोकसभा पर्यवेक्षक कांतिभाई खराड़ी, एआईसीसी के राजेंद्र सिंह कुंपावत और एआईसीसी के बीपी सिंह ने मंगलवार दोपहर 2 बजे से उदयपुर लोकसभा की सलूंबर, झाडोल, खेरवाड़ा, उदयपुर ग्रामीण, गोगुंदा, आसपुर और धरिवावद और उदयपुर शहर विधानसभा क्षेत्रों से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ और कार्यकर्ताओं से अलग-अलग बात कर हर विधानसभा की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने वर्ष 2018 में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशियों से पूछा कि जब 2018 में कांग्रेस की लहर थी तो वे कैसे चुनाव हार गए और अब कैसे जीतोगे। साथ ही पूछा कि 2018 में उनके कितने वोट आए थे और जीतने वाले प्रत्याशी के कितने वोट थे। उदयपुर देहात जिले के एआईसीसी और पीसीसी सदस्य, बोर्ड निगम आयोग के उपाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी, सांसद प्रत्याशी, विधायक, विधायक प्रत्याशी, जिला कांग्रेस कार्यकारिणी, पूर्व जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षए मंडल अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष, उदयपुर देहात जिले के प्रधान- उपप्रधान, नगर निकाय अध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, नगर निगम एवं नगर परिषद के निर्वाचित पार्षद एवं से वे चुनाव लड़ रहे है तो आम जनता में उनकी मिलकर हर विधानसभा का फीडबैक लिया। इस पकड़ है। ऐसे में वे चुनाव कैसे हार गए। साथ ही पूछा कि वे पिछली बार नहीं जीत पाए तो अब चुनाव कैसे जीतेंगे। इस पर अधिकांश प्रत्याशियों के पास कोई जवाब नहीं था । इस मौके पर नए दावेदारों से भी पूछा कि वे चुनाव कैसे जीतेंगे और उनकी क्या रणनीति है तो उन्होंने अपनी रणनीति बताई। चारों पर्यवेक्षक एक-एक दावेदार से मिले और उनसे बातचीत की। इन सभी नेताओं ने अग्रिम संगठन व प्रकोष्ठों, विभागों के अध्यक्षों से दौरान उदयपुर देहात कांग्रेस अध्यक्ष कचरू लाल चौधरी, उदयपुर शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़, पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा, खेरवाड़ा विधायक डॉ दयराम परमार, विधायक नगराज मीणा, पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष हिरालाल दरांगी, पूर्व मंत्री डॉ मांगीलाल गरासिया, झाडोल विधायक प्रत्याशी सुनील कुमार भजात, कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।
दावेदारों के समर्थकों ने की नारेबाजी
इस दौरान शहर विधानसभा से दावेदारों ने जोरदार नारेबाजी की। शहर विधानसभा से दावेदारी कर रहे राजीव सुहालका और दिनेश खोड़निया के समर्थकों ने नारेबाजी कर समर्थकों ने दावेदारी पेश की। मौके पर अन्य नेताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत किया।
2013 में मोदी लहर में जीता, 2018 में टिकट नहीं दिया

Editorial
Next Story
Related News
X
