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अन्तःकरण को काबू में रखना संयम धर्म
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विरार (Virar) स्थानक में साध्वी डॉ. स्नेहप्रभा ने दैनिक प्रवचन में कहा कि स्वच्छंदाचार को रोककर अपनी इन्द्रियों को अपने अन्तःकरण को काबू में रखना संयम धर्म (Religion) है।

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मुंबई । विरार (Virar) स्थानक में साध्वी डॉ. स्नेहप्रभा ने दैनिक प्रवचन में कहा कि स्वच्छंदाचार को रोककर अपनी इन्द्रियों को अपने अन्तःकरण को काबू में रखना संयम धर्म (Religion) है। संयम ही मोक्ष प्रदान करने वाला है। संयमी सदैव आनंद में रहते है। लाभ-अलाभ, हर्ष-शोक, सुख दुःख में मस्त रहते है। महासती ने शहीद भगतसिंह को याद करते हुए उसके संयम योग को स्मरण किया। साध्वी डॉ. प्रज्ञाश्री ने उपासक दशांग सूत्र आधारित आनंद आप का विवेचन किया। सभा में अध्यक्ष लक्ष्मीलाल कच्छारा, रतनलाल जैन, हिम्मत दौलावत, ललित कोठारी, प्रेमचंद जैन, गहरीलाल जैन, खूबीलाल जैन, चंद्रप्रकाश तलेसरा आदि उपस्थित थे।

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