Pratahkal-Shreyaskar development in good direction: Acharya Mahashraman
मुंबई । रविवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) की सन्निधि में विकास महोत्सव आयोजित हुआ। आचार्य तुलसी के पट्टोत्सव को आचार्य महाप्रज्ञ ने विकास महोत्सव का रूप प्रदान किया था। तब से यह महोत्सव पूरे धर्मसंघ को अभिप्रेरित करता है।
आचार्यश्री के महामंत्रोच्चार से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तेरापंथ महिला मण्डल-मुम्बई (Terapanth Mahila Mandal-Mumbai) ने गीत का संगान किया। साध्वीवृन्द ने भी गीत का संगान किया। विकास परिषद के संयोजक मांगीलाल सेठिया व सदस्य पदमचंद पटावरी ने अभिव्यक्ति दी।
साध्वीवर्या व साध्वीप्रमुखा ने आचार्य तुलसी के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व का वर्णन किया। आचार्य महाश्रमण ने कहा कि आगम में वर्धमान होने की शुभाशंसा की गई है। वर्धमानता की दिशा यदि सही हो तो वह श्रेयस्कर होता है और यदि वर्धमानता की दिशा गलत हो तो वह व्यक्ति, समाज व राष्ट्र के लिए हानिकर साबित हो सकता है। विकास होना सही है, किन्तु इसके साथ-साथ विकास की दिशा का भी सही होना बहुत आवश्यक है। विकास आध्यात्मिक रूप में भी होता है और विकास भौतिक रूप में भी होता है। भौतिक विकास का भी देश, समाज और परिवार के लिए अपेक्षित हो सकता है।
तेरापंथ आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ संघ है। यहां आध्यात्मिक विकास की बात है। आचार्य भिक्षु ने इसकी स्थापना की। धर्मसंघ ने विकास किया। आठवें आचार्य कालूगणी हुए। उन्होंने ऐतिहासिक कार्य करते हुए एक 22 वर्षीय युवा मुनि तुलसी को अपना युवाचार्य घोषित कर दिया। इतनी कम उम्र में युवाचार्य बनने वाले मुनि तुलसी तेरापंथ धर्मसंघ के पहले व्यक्तित्व थे। बाद में युवावस्था में ही मुनि तुलसी तेरापंथ धर्मसंघ के नवमें अनुशास्ता बन गए। उनके समय में धर्मसंघ ने बहुमुखी विकास किया। अणुव्रत आन्दोलन के रूप में मानवता के विकास भी अद्भुत क्रम आरम्भ हुआ। वे तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास के पहले आचार्य थे, जिन्होंने अपने आचार्य पद का विसर्जन कर दिया। यह विसर्जन ही विकास महोत्सव का मूल आधार बना। गुरुदेव तुलसी ने पद के विसर्जन के उपरान्त अपना पट्टोत्सव न मनाने की बात कही तो सुशिष्य आचार्य महाप्रज्ञ ने अपने गुरु के पट्टोत्सव को विकास महोत्सव के रूप में मनाने के लिए एक पत्र बना दिया, जिसे गुरुदेव तुलसी को भी स्वीकार करना पड़ा।
आचार्यश्री ने विकास परिषद के संयोजक मांगीलाल सेठिया को बारहव्रत का त्याग कराया। आचार्यश्री ने कहा कि चतुर्विध धर्मसंघ विकास करे। इस अवसर पर उन्होंने ने स्वरचित गीत का संगान किया।
विकास महोत्सव पर आचार्य महाश्रमण ने बहिर्विहारी चारित्रात्माओं के चतुर्मास के उपरान्त चतुर्मास व विहार क्षेत्रों की भी घोषणा की। आचार्यश्री ने 77 वर्षीय मुमुक्षु धनराज बैद को 22 नवम्बर को मुनि दीक्षा प्रदान करने की घोषणा के साथ तीन मुमुक्षुओं मुकेश, विकास और बंधन को साधु प्रतिक्रमण सीखने की अनुमति प्रदान की। उन्होंने कहा कि आज से मुख्यमुनि महावीरकुमार जैन रामायण का व्याख्यान रात्रि आठ बजे से करेंगे। इस दौरान राजसमंद-राजस्थान की विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने आचार्यश्री के दर्शन कर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
विधायक माहेश्वरी का सम्मान प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मदनलाल तातेड मुख्य प्रबंधक मनोहरलाल गोखरू महामंत्री सुरेंद्र कोठारी महेश बाफना ने किया।
Editorial

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