vitamin d
स्वस्थ शरीर के लिए विटामिन-डी (Vitamin-D) भी बहुत आवश्यक होता है। यह फैट विटामिन होता है। यह शरीर को कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस (Phosphorus) देने में भी मदद करता है। शोध के अनुसार, विटामिन डी कैंसर के खतरे को भी कम करता है लेकिन वहीं दूसरी ओर यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो हड्डियां कमजोर, शरीर में मौजूद सेल्स की कमी, थकान चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। विटामिन-डी की कमी से लोग बहुत जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि विटामिन-डी की आपके शरीर को कितनी जरुरत होती है और आप कैसे इसकी कमी पूरी कर सकते हैं....
कैसे करता है शरीर को प्रभावित ? विटामिन-डी शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होता है। इसकी कमी पूरी करने के लिए बहुत से लोग धूप लेते हैं। इसके अलावा विटामिन-डी बहुत से बीमारियों से भी आपको दूर रखता है। विटामिन-डी की कमी का नैचुरल स्त्रोत
(Natural sources)
धूप है।
इसके अलावा कुछ फूड्स का सेवन करके भी आप विटामिन-डी की कमी पूरी कर सकते हैं। इसकी कमी से आपको जोड़ों और हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकान, डिप्रेशन और तनाव, डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं। किन फूड्स से करें कमी पूरी विटामिन-डी की कमी पूरी करने के लिए आप विटामिन डी 3 से युक्त आहार का सेवन करें। पनीर, कॉड लिवर तेल (Cod liver oil), संतरे का जूस, डेयरी प्रोडक्ट्स जैसी चीजें अपनी डाइट में शामिल करके विटामिन-डी की कमी पूरी कर सकते हैं।
फूड्स के अलावा ऐसे पूरी करें कमी आप डाइट में विटामिन-डी को शामिल करके और सूर्य के किरणों (Sun's rays) को पर्याप्त मात्रा में लेकर विटामिन-डी की कमी शरीर में से पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाकर भी आप विटामिन डी की कमी को 90त्न तक कम कर सकते हैं। पूरे कपड़े पहने ताकि त्वचा ढकी रहे। धूप में कम बैठें।
किन लोगों को होती है विटामिन डी की कमी
विटामिन-डी की कमी खराब खान पान की क्रिया में बदलाव होने के कारण, यूवी किरणों के संपर्क में नहीं आने से, दूध से दूर रहने वाले लोगों को भी विटामिन-डी की कमी हो सकती है।
कमी होने पर शरीर को खतरा
इसकी कमी होने पर शरीर की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिससे फेक्चर का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बहुत से लोगों की इम्यूनिटी पॉवर भी इस विटामिन की कमी के कारण कमजोर होने लगती है। जिससे हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी समस्याएं होने का खतरा रहता है।
Editorial

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