Pratahkal-RSS Chief Sarsanghchalak Mohan Bhagwat reached the presence of Acharya Mahashraman
मुंबई । नन्दनवन (Nandanvan) में चातुर्मास (Chaturmas) कर रहे आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Sarsanghchalak Mohan Bhagwat) पहुंचे। आचार्यश्री के प्रवास कक्ष पहुंच उन्होंने आशीर्वाद प्राप्त किया। दोनों का कुछ समय तक वार्तालाप का भी क्रम रहा। तदुपरान्त आचार्य महाश्रमण के साथ भागवत भी मुख्य प्रवचन कार्यक्रम हेतु तीर्थंकर समवसरण पहुंचे।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सामान्य रूप में आदमी ही नहीं, पशु, पक्षी, कीड़े, मकोड़े भी जीवन जीते हैं। प्रश्न होता है कि आदमी आदमी जीवन क्यों जीए? अनेक संदर्भों में अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन शास्त्रोक्त दृष्टि से आदमी को अपने पूर्व कर्मों का क्षय कर अपनी आत्मा के कल्याण के जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। जिस प्रकार आदमी एक वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा भी एक शरीर को छोड़कर दूसरा शरीर धारण कर लेती है। जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसी आत्मा कर्मों से बंधी होती है। आदमी अपने पूर्व कर्मों को क्षय करने तथा अपनी आत्मा के कल्याण के लिए जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। आदमी साधुओं की तरह महाव्रतों का पालक न बन सके तो गुरुदेव तुलसी द्वारा चलाए गए अणुव्रत आन्दोलन के छोटे-छोटे व्रतों और नियमों को स्वीकार कर अपनी आत्मा के कल्याण का प्रयास कर सकता है।
आज आचार्य कालूगणी की वार्षिकी पुण्यतिथि है। उनके समय में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शुभारम्भ हुआ था। भारत में ग्रन्थ, पंथ और संत की अच्छी संपदा है। इनका अच्छा उपयोग कर स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र के बाद स्वस्थ विश्व का प्रयास भी किया जा सकता है। आज संघ प्रमुख का आना हुआ है। ये एक अच्छे व्यक्तित्व हैं। प्रचारक भी मानों कुछ अंशों में संन्यासी जैसा होता है। आप खूब राष्ट्र धर्म और अध्यात्म की सेवा करते रहें। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अच्छा संगठन कार्य करते हुए आध्यात्मिक विकास करता रहे।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आचार्य महाश्रमण जैसे राष्ट्रसंत के समक्ष बोलना आवश्यक नहीं समझता, किन्तु उनकी आज्ञा है, तो बोलना पड़ेगा। अंधकार से प्रकाश की ओर, असत् से सत् की ओर और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाने का प्रयास आचार्यश्री कर रहे हैं। ऐसे दिव्य संतों का भारत की भूमि पर निरंतर प्रवाह भारत की सनातन परंपरा का सौभाग्य है। आज भारत की संत व सनातन की परंपरा विश्व का पथ दर्शन कर रही है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसे आचार्यश्री से प्रेरणा लेकर हम अपने को उस लायक बनाएं कि हम भी भारत की गुरुता को बनाए रखें। प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मदनलाल तातेड़ ने स्वागत वक्तव्य दिया।
Editorial

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