Akshay Sagar Maharaj
मुंबई। सकल दिगम्बर जैन समाज भायंदर पश्चिम में भगवान नेमिनाथ स्वामी (Lord Neminath Swami) जिनालय में वर्षावास कर रहे मुनि अक्षय सागर महाराज (Akshay Sagar Maharaj) ससंघ सानिध्य पर्यूषण पर्व में प्रातः श्रीजी का अभिषेक, अष्ट द्रव्यों के महाअर्घ, प्रतिक्रमण, आरती, धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रोग्रामों का ठाठ चल रहा है। चातुर्मास कमेटी के कमल गंगवाल ने बताया कि प्रत्येक दिन प्रवचन की गंगा प्रवाहित हो रही है। उत्तम मार्दव धर्म पर कहा कि दस दिनों में धर्म का संग्रह करें। जैसे छोटे नन्हे बालक को मां दूध पिलाकर हष्ट-पुष्ट कर देती है, वैसे ही धर्म हमें पुष्ट करता है। आत्मविकास, आत्मशुद्धि, निजत्व के निखार के लिये धर्म के पथ पर विचरण करना चाहिए। कठोर जमीन पर बीज डालने से बीज व्यर्थ जाता है। बीज डालने के लिए ग्रीष्म काल में मिट्टी ऊपर नीचे करनी पड़ती है, सावन की झड़ी से मिट्टी कोमल हो जाती है फिर बीज रोपड़ करते हैं। एक बीज से हजार बीज प्राप्त हो जाते हैं। मन की भूमि कठोर हो तो ज्ञान की बारिश कठोरता के कारण अंतरंग तक नहीं जा पाती। विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है और धन से सुख।
अलंकार सोने के ही बनते हैं क्योंकि वह मृदु है। लोहे की कठोरता उसे सस्ता बना देती है। उत्तम मार्दव धर्म हमें एवं हमारे परिणामों को शांत एवं मृदु करने के लिये आता है। विषयी व्यक्ति विषय भोगता है, आत्मतत्व भोग नहीं सकता। यह जानकारी राजमल पेमावत ने दी।
Editorial

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