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आर राजगोपालव : तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने हाल ही में हिंदी में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट डालकर सबको चौंका दिया है। इससे न केवल हिंदी विरोधियों को झटका लगा, बल्कि हिंदी प्रेमी भी इससे खुश हैं और इसे स्वागत योग्य कदम बता रहे हैं। वर्ष 1965 में हिंदी विरोधी आंदोलन को लेकर सुर्खियों में रही द्रमुक ने अचानक मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से किए गए पोस्ट में लिखा है कि : जब तक महिलाओं को यह मासिक अनुदान मिलता है, इसका मतलब है कि स्टालिन इस भूमि पर (तमिलनाडु में ) शासन करता है।
क्या यह द्रमुक द्वारा सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों से उठे व्यापक विवाद के बाद पार्टी द्वारा सोची-समझी गई रणनीति के तहत उठाया गया कदम है? अचानक पार्टी के रूख में आए इस बदलाव का कारण क्या है? इस ट्वीट के समय को देखते हुए समझा जा सकता है कि एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को लेकर जो विवादास्पद टिप्पणियां कीं, उससे न सिर्फ द्रमुक, बल्कि विपक्षी दलों का नवगठित गठबंधन 'इंडिया' भी बैकफुट पर आ गया है और उसी से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है।
अथवा यह ट्वीट इसलिए जरूरी हो गया था, क्योंकि एमके स्टालिन को लगा कि उनका वन लाइनर बयान तीखा गया था ? गौरतलब है कि मुख्यमंत्री स्टालिन ने अन्नादुरई के जन्मदिन पर एक लोकप्रिय सामाजिक कल्याण योजना का शुभारंभ करते हुए यह बयान दिया था । द्रमुक को मुख्यमंत्री स्टालिन का वन लाइनर और तमिल में एक वीडियो पोस्ट करने की अचानक जल्दबाजी क्यों हुई ? तमिलनाडु के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि द्रमुक ने मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि द्वारा उठाए गए सनातन धर्म विवाद पर आम लोगों एवं राजनीतिक पार्टियों के गुस्से को कम करने के लिए हिंदी में पोस्ट डाली ।
पिछले दो महीने से तमिलनाडु सरकार व्यापक रूप से पढ़े जाने वाले हिंदी दैनिक अखबारों में हिंदी विज्ञापन प्रकाशित करवा रही है। इसके अलावा, द्रमुक ने फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बहुत सारी हिंदी सामग्री पोस्ट करना शुरू कर दिया है। क्या यह द्रमुक द्वारा उत्तर भारतीयों के करीब जाने की कोशिश है, ताकि यदि विपक्षी इंडिया गठबंधन केंद्र की सत्ता में आए, तो उसे पर्याप्त महत्व मिले? क्या इसका मतलब यह भी है कि द्रमुक हिंदी पर अपने रूख से समझौता करेगी ? संयोग से यह पोस्ट द्रमुक द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर अपलोड किया गया था। उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा लोकप्रिय रूप से हिंदी दिवस मनाया जाता है।
भारतीय जनता पार्टी ) विपक्षी दल है, लेकिन उसने भी द्रमुक द्वारा हिंदी में पोस्ट किए जाने का स्वागत किया है और कहा है कि हृदय परिवर्तन का हमेशा स्वागत है। गौरतलब है कि 2019 के हिंदी दिवस पर गृहमंत्री अमित शाह के इस बयान पर कि हिंदी देश में सबसे अधिक पढ़ी और समझी जाने वाली भाषा है, स्टालिन ने जवाबी हमला बोला था कि यह 'इंडिया है, हिंदिया नहीं'। एमके स्टालिन के पिता और द्रमुक के संस्थापक करूणानिधि का हिंदी विरोध तो जगजाहिर ही था । उन्होंने गैरहिंदी भाषी लोगों पर हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए हिंदी का विरोध किया था। लेकिन अब जबकि द्रमुक हिंदी में पोस्ट कर रही है, तो तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी भाजपा आश्चर्यजनक रूप से इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देखकर स्वागत कर रही है। भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष नारायणन तिरूपति ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि इस तरह के हृदय परिवर्तन का हमेशा स्वागत है।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बयान जारी कर सनातन धर्म विवाद पर भी यू टर्न ले लिया है। उनका कहना है कि भाजपा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) घोटाले को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से जनता का ध्यान भटका रही है। स्टालिन ने अपने प्रवक्ता को सलाह दी कि वह सनातन विवाद में न पढ़ें, बल्कि भाजपा की विफलताओं पर ध्यान केंद्रित करें। उदयनिधि ने भी कहा था, भाजपा कैग की रिपोर्ट पर चुप है, जिसमें 7.5 लाख करोड़ रू. के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। उसी दिन एमके स्टालिन ने संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले अपनी पार्टी के 33 सांसदों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्हें चेतावनी दी कि वे किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर दोनों सदनों में बहस के दौरान भाजपा के उकसावे में न आएं। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों को भाजपा के भ्रष्टाचार पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
दूसरी तरफ कोवई सत्यन जैसे अन्नाद्रमुक के नेताओं ने टिप्पणी की कि द्रमुक अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे से बाहर निकलने की हताश कोशिश कर रही है। इसीलिए द्रमुक अचानक हिंदी में पोस्ट करने लगी है। अन्नाद्रमुक समेत विपक्षी दलों ने ओणम पर केरलवासियों के लिए मलयालम में शुभकामना वीडियो जारी करने के लिए भी स्टालिन का मजाक उड़ाया और कहा कि अगर वह हिंदी में पोस्ट कर सकते हैं, तो गणेश चतुर्थी या दिवाली या रामनवमी पर उत्तर भारतीयों को शुभकामनाएं क्यों नहीं दे सकते ? इससे पहले भी अन्नाद्रमुक नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम ने हिंदी भाषा को लेकर तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम ( द्रमुक) सरकार के दोहरे मानकों को लेकर हमला बोला था । द्रमुक के हिंदी पोस्ट पर एक्स उपयोगकर्ताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिन्हें पढ़ना काफी दिलचस्प है। कुछ लोगों ने स्टालिन के वीडियो में हिंदी कैप्शन की जरूरत पर सवाल उठाए हैं, तो कुछ अन्य लोगों ने उदयनिधि की पुरानी तस्वीरें खोज निकाली हैं, जहां उन्हें 'हिंदी थेरियथु पोडा '( मैं हिंदी नहीं जानता) नारे वाली टी-शर्ट पहने देखा गया था।
द्रमुक के हिंदी पोस्ट को लेकर लोगों का नजरिया चाहे जो भी हो, यह पार्टी के नजरिये में एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है, जिसका हिंदी पट्टी के लोग व्यापक रूप से स्वागत कर सकते हैं, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या स्टालिन और उनकी पार्टी बांग्ला, उड़िया, गुजराती, मराठी और असमिया भाषियों तक इसी तरह की पहुंच बनाएगी।
Editorial

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