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बरगद, नीम, अंबुआ की छांव जरूरी है, इसीलिए तो हिंदुस्तान में गांव जरूरी है..
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राजसमंद (प्रात:काल कर दो से किया। संवाददाता)। गणपति महोत्सव (Ganpati Festival) के प्रथम दिन हाउसिंग बोर्ड युवा मित्र मंडल (Housing Board Yuva Mitra Mandal) गोविंद नगर हाउसिंग बोर्ड राजसमंद (Govind Nagar Housing Board Rajsamand) के दुर्गा माता मंदिर परिसर में प्रथम बार आयोजित कवि सम्मेलन में विभिन्न कवियों ने अपनी कविताओं से खूब आनंद बरसाया।

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राजसमंद (प्रात:काल कर दो से किया। संवाददाता)। गणपति महोत्सव (Ganpati Festival) के प्रथम दिन हाउसिंग बोर्ड युवा मित्र मंडल (Housing Board Yuva Mitra Mandal) गोविंद नगर हाउसिंग बोर्ड राजसमंद (Govind Nagar Housing Board Rajsamand) के दुर्गा माता मंदिर परिसर में प्रथम बार आयोजित कवि सम्मेलन में विभिन्न कवियों ने अपनी कविताओं से खूब आनंद बरसाया। कवि सम्मेलन के सूत्रधार कवि गौरव पालीवाल ने बताया कि कवि सम्मेलन के प्रारंभ में आयोजकों ने सभी कवियों का स्वागत किया। रघुनाथपुरा आमेट की नवोदित कवयित्री भावना लोहार ने अपनी सरवस्ती वंदना हे स्वर की देवी मां मेरा कंठ मधुर कर दो से किया। ·कवि गौरव पालीवाल ने केसा समय का चक्र है कैसी इसकी चाल, हंसो को दे रही सजा कौवों की चौपाल द्वारा कवि सम्मेलन की शानदार शुरुआत की। कुंभलगढ़ के कवि गोपाल शर्मा ने महाराणा प्रताप की एकलिंग नाथ के समक्ष की प्रार्थना नाथ मूं ऊबो शरण थारी से भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी ।
नाथद्वारा के हास्य कवि कानू पंडित ने अपने अनोखे अंदाज में खूब गुदगुदाया वहीं बरगद, नीम, अंबुआ की छांव जरूरी है, इसीलिए तो हिंदुस्थान में गांव जरूरी है द्वारा भारत की संस्कृति में गांवों और उसके संस्कारों का चित्रण किया। वीर रस के कवि सतीश आचार्य ने चेतक की टप टप जौहर की % वाल यहां राष्ट्र प्रेमियों की तीर्थ भूमि ये मेवाड़ है और खून हिंदू का गिरे या मुसलमान का आंगन तो लाल होता है हिंदुस्थान का द्वारा कवि सम्मेलन को नई ऊंचाइयां दी। प्रसिद्ध पेरोडिकार सम्पत सुरीला ने जेवंता का जाया था महलों को ठुकराया था दासता कभी ना मानी थी पगड़ी की लाज बचानी थी बस इतनी थी दिल की आरजू द्वारा महाराणा प्रताप के संघर्ष के चित्रण के साथ ही अनेक पेरोडिया सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उदयपुर के वरिष्ठ कवि डाडम चंद दाड़म ने राजस्थानी में अपनी अनेक हास्य कविताओं को सुनाते हुए अपनी प्रसिद्ध कविता कोई दो लुगायां करो मति वगड़ी जावेली मनख गति और म्हारा व्याइजी व्याव किदो म्हारी लुगाई ने कापड़ो ओर मने फाटो धोवत्यो दीदो जैसी रचनाओं द्वारा खूब हास्य रस बरसाया। युवा कवयित्री भावना लोहार ने श्रृंगार रस के अनेक छंद पढ़े और बेटियों के सम्मान में मां बाप के घर की शान है बेटी जैसी भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की ।
जाने माने गजलकार सूर्य प्रकाश दीक्षित ने सब कुछ बदल जाए पर वो नहीं बदलती मां बाप की जवानी है तस्वीरों में रचना द्वारा तस्वीरों के विभिन्न आयामों का चित्रण किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कुणाल आचार्य ने दिल के हर कोने में दिक्कत होती है, तुमतो रोज ही सपनों में चली आती हो हमको सोने में दिक्कत होती है जैसी श्रृंगार रस की रचना पढ़ी। इस दौरान हाऊसिंग बोर्ड युवा मित्र मण्डल के विपुल श्रीमाली, महिपाल सिंह शक्तावत, पुष्पेंद्र सुरजपुरा, महेंद्र सिंह तंवर, रावी पंडित, जयपाल सिंह राठौड़, शैलेश हाड़ा, दर्शन सेन सहित सैकड़ों की संख्या में नगर जन उपस्थित थे।
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