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नई दिल्ली (एजेंसी)। विपक्ष (Opposition) जिस तरह इंडिया एलायंस बनाकर फ्रंटफुट पर खेलने रहा था क्या वो जोश ठंडा पड़ रहा है? क्या इंडिया एलायंस अपने नेताओं की अति महत्वाकांक्षा का शिकार हो गई? क्या इंडिया एलायंस की नींव ही कमजोर थी? 2024 के लोकसभा चुनावों (Loksabha election) और विपक्ष की चर्चा होते ही इस तरह की कई बातें आजकल होने लगती हैं। आम लोगों की जिज्ञासा है कि सही क्या है?
इधर हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो कांग्रेस (Congress) बड़े भाई का रोल तो निभा रही है पर कुर्बानी देने वाली भूमिका न अपनाकर प्रभुत्व वाले अंदाज में आ गई है। कर्नाटक (Karnataka) चुनावों में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस पूरे फार्म में है और सहयोगी दल वाली भावना नहीं दिखा पा रही है। शायद यही कारण है कि नीतीश कुमार
(Nitish Kumar)
और ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) जैसे कद्दावर लोग गठबंधन से दूरी बना रहे हैं। आज जिस रूप में इंडिया गठबंधन दिख रहा है उसमें नीतीश कुमार की सबसे बड़ी भूमिका रही है, इसमें कहीं से कोई भी संदेह नहीं किया जा सकता है। पर नीतीश कुमार ही कई मौकों पर इस तरह बोल रहे हैं जिससे लगता है कि इंडिया में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि इसका एकमात्र कारण है कि कांग्रेस का अतिआत्मविश्वास आइये देखते हैं कि क्यों ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस अपने बड़े भाई की भूमिका ठीक से नहीं निभा रही है।
एंकरों का बॉयकॉट हो गया, नीतीश को पता ही नहीं
बिहार (bihar) के मुख्यमंत्री और जदयू (JDU)
प्रमुख नीतीश कुमार ने शनिवार को जिस तरह उम्मीद के विपरीत 14 टीवी न्यूज एंकरों के बहिष्कार करने के इंडिया गठबंधन के फैसले से असहमति जता दी वो गौर करने लायक है। उन्होंने दो टूक बोल दिया कि वह पत्रकारों के सपोर्ट में हैं ।
इंडिया एलायंस की मीडिया उप- समिति ने 14 टीवी एंकरर्स के शो का बहिष्कार का फैसला लिया था। इतने महत्वपूर्ण फैसले पर क्या नीतीश नहीं ली गई एक अलग मसला है पर कुमार से सलाह नहीं ली गई ? सलाह इन्फॉर्म भी नहीं किया गया तो और भी गंभीर मामला है। नीतीश कुमार ने जिस तरीके से कहा कि उन्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं पता है इसका मतलब साफ है उन्हें खबर ही नहीं किया गया।
मान लीजिए कि उन्हें खबर किया गया पर उन्होंने जानबूझकर प्रेस के सामने न जानने का नाटक किया। अगर ऐसा है तो इंडिया गठबंधन के लिए और खतरनाक संदेश है । पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि यह पूरी लिस्ट कांग्रेस के मीडिया सेल ने बनाई थी और बिना सहयोगी दलों के राय मशविरे के भेजी लगती है।
एंकरों के बॉयकॉट के मुद्दे पर नीतीश ने जो बोला उसका विश्लेषण कीजिए। देखिए गठबंधन के लोगों के लिए नीतीश क्या कहते हैं। नीतीश कहते हैं कि गठबंधन में जो लोग हमारे साथ हैं उन लोगों को लगा होगा कि कुछ इधर-उधर हो रहा है। हालांकि, हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। सबको आजादी मिलेगी, जिसको जो अच्छा लगेगा वो लिखेगा। सबके अधिकार हैं।
नीतीश कुमार ने ये लाइनें अपनी झेंप मिटाने के लिए थी या कांग्रेस को संदेश देने के लिए उन्होंने कही, ये तो वो ही जानते होंगे। पर नीतीश जो चाहते थे वो तो कर ही दिया।
जातिगत जनगणना मुद्दे पर ममता की अनदेखी
इंडिया एलायंस में जाति आधारित गणना को को लोकसभा चुनावों में मुद्दा बनाने पर लगभग सहमति बन चुकी है। समन्वय समिति की बैठक के बाद पिछले हफ्ते कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने मीडिया से यही कहा था । लेकिन यह जानते हुए कि तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी जो इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं वो इसका विरोध कर रही हैं, उनके बिना कांग्रेस ने यह जल्दबाजी क्यों की?
जातिगत जनगणना के मुद्दे पर लगातार राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी बोल रहे हैं। क्या बिना ममता बनर्जी के सपोर्ट के इंडिया गठबंधन सर्वाइव कर सकेगा? या जानबूझकर ऐसी कोशिश की जा रही है कि राहुल गांधी के प्र.म. पद के लिए जितने कॉम्पिटिटर हैं उनसे धीरे- धीरे मुक्ति पा लिया जाए।
आम आदमी पार्टी से कांग्रेस दो-दो हाथ करने को तैयार
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और कांग्रेस को लेकर हर दिन एक नहीं खबर मीडिया में आ रही है। कभी पंजाब (Panjab) तो कभी हरियाणा (Hariyana), कभी दिल्ली (Dehli) तो कभी मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) से ऐसी खबरें आती हैं कि कांग्रेस की राज्य इकाई नहीं चाहती कि आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस चुनाव लड़े । यही हाल आम आदमी पार्टी का भी है। आप की इकाइयां भी यही कहती हैं हम अकेल चुनाव लड़ेगे। दरअसल यहां भी कांग्रेस अपने बड़े भाई के रोल में नहीं काम कर रही है। यह सही है कि आम आदमी पार्टी की महत्वाकांक्षाएं बढ़ती जा रही हैं पर पिछला रिकॉर्ड आम आदमी पार्टी के फेवर में हैं । इसलिए आज अगर आम आदमी पार्टी जो कह रही है उसका हक बनता है। अगर राहुल की भारत जोड़ो यात्रा और हिमाचल-कर्नाटक चुनाव जीतने के आधार पर कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी को टिकट शेयर करने को तैयार नहीं है तो निश्चित है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करेगी। अगर एनडीए को मात देना है तो कांग्रेस को बड़े भाई वाले रोल में आना होगा और हर कुर्बीनी के लिए तैयार रहना होगा ये कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के साथ ही नहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ करना होगा ।
सीट शेयरिंग के मुद्दे पर अभी कोई बात नहीं करना चाहती कांग्रेस
कांग्रेस चाहती है 5 राज्यों में चुनावों के रिजल्ट आने के बाद ही किसी भी प्रकार के सीट शेयरिंग की बात की जाए। दरअसल कांग्रेस कर्नाटक चुनावों की जीत से बहुत उत्साहित है। इधर कई चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भी उसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बहुमत मिलते दिख रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि अभी सीट शेयरिंग का कोई फार्मूला अभी बनाया जाए। यह तय है कि अभी की स्थित में उसे सीट शेयरिंग में घाटा होगा । अगर इन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनती है तो कांग्रेस हक के साथ अधिक सीटों पर अपनी हिस्सेदारी की डिमांड करेगी। पर कांग्रेस की यह चाल सहयोगी भी समझ रहे हैं।
अडानी के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने किसी की नहीं सुनी
मुंबई में इंडिया एलायंस की पीसी में जिस तरह राहुल गांधी ने अडानी का मुद्दा उठा दिया था उसका ममता बनर्जी ने तो खुलकर विरोध कर दिया था। पर अंदरूनी तौर पर कई दलों ने कांग्रेस के इस रवैये पर नाराजगी जताई थी। पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस इतनी आत्मविश्वास में है कि उसे इंडिया एलायंस को यूपीए की तरह ट्रीट करने लगी है। उसे लगता है कि सब हमें फॉलो ही करेंगे।
Editorial

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