Pratahkal-Indian Railways-Electrification work in full swing in Northeast Frontier Railway

मालीगांव । जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) विश्व में सबसे बड़ा "ग्रीन रेलवे" बनने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रहा है। पूर्ण विद्युतीकरण के प्रयास में, पू. सी. रेल ने शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के अपने लक्ष्य के अंश के रूप में, 1788.584 आरकेएम (रूट किलोमीटर) का विद्युतीकरण हासिल किया है, जो इस नेटवर्क के कुल 4348 आरकेएम का 41.13% है। इस जोन ने दिसंबर, 2023 तक अपने संपूर्ण रूट किलोमीटर को विद्युतीकृत करने की योजना बनायी है।
पूर्वोत्तर राज्यों में कुल 2975.23 किलोमीटर रूट का विद्युतीकरण किया जाना है। पूर्वोत्तर के कुल विद्युतीकृत रूट में से असम के 748.409 किलोमीटर और मेघालय के 9.58 किलोमीटर पहले ही विद्युतीकृत किया जा चुका है। मेघालय को पहली बार 15 मार्च, 2023 को इलेक्ट्रिक ट्रेन मिली। इसके अलावा, पू. सी. रेल के क्षेत्राधिकार के अधीन बिहार में 285.869 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में 744.726 किलोमीटर पहले ही विद्युतीकरण किया जा चुका है।
पू. सी. रेल के विद्युतीकरण कार्यों में और तेजी लाने के लिए, इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन इंटरनेशनल लिमिटेड (इरकॉन), रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स), पू. सी. रेल/निर्माण और सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन फॉर रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन (कोर) चरणबद्ध तरीके से विद्युतीकरण कार्यों को क्रियान्वित कर रहे हैं। कुछ प्रमुख खंडों में अलीपुरद्वार मंडल में न्यू कोचबिहार - गोलकगंज - धुबड़ी (78 आरकेएम); तिनसुकिया मंडल में सिमलुगुड़ी - डिब्रुगढ़ (97 आरकेएम); लामडिंग मंडल में काटाखाल - भैरबी (84 आरकेएम); कटिहार मंडल में रानीनगर - जलपाईगुड़ी - हल्दीबाड़ी (31 आरकेएम) और रंगिया मंडल में हेलेम - हारमती - नाहरलगुन (79 आरकेएम) शामिल हैं।
विद्युतीकरण पू. सी. रेल पर ट्रेनों की गतिशीलता में काफी सुधार करेगा और पूर्वोत्तर राज्यों में रेल नेटवर्क को मजबूत करेगा। जीवाश्म ईंधन से विद्युत में शिफ्ट किये जाने पर प्रदूषण में कमी के अलावा रेलवे के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार होगा। इससे निर्बाध परिवहन में सुविधा के साथ-साथ ट्रेनों की औसत गति में भी वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेनों की आवाजाही समयपाबंद होगी।
Editorial

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