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'एक देश, एक चुनाव' पर केंद्र सरकार ने बनाई कमेटी
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नई दिल्ली (एजेंसी)। 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इसको लेकर एक कमेटी का गठन किया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस कमेटी का मकसद एक देश एक चुनाव के कानूनी पहलूओं पर गौर करेंगी। सूत्रों का यहां तक कहना है कि एक देश, एक चुनाव पर सरकार बिल ला सकती है। 'एक देश, एक चुनाव' कमेटी गठन को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने निशाना साधा है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा, एक देश, एक चुनाव पर केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है। अभी इसकी जरूरत

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नई दिल्ली (एजेंसी)। 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इसको लेकर एक कमेटी का गठन किया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस कमेटी का मकसद एक देश एक चुनाव के कानूनी पहलूओं पर गौर करेंगी। सूत्रों का यहां तक कहना है कि एक देश, एक चुनाव पर सरकार बिल ला सकती है। 'एक देश, एक चुनाव' कमेटी गठन को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने निशाना साधा है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा, एक देश, एक चुनाव पर केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है। अभी इसकी जरूरत नहीं है। पहले बेरोजगारी और महंगाई का निदान होना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। चर्चा है कि इस सत्र में 'एक देश, एक चुनाव' पर सरकार बिल ला सकती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरूवार को इस मुद्दे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। मुंबई में विपक्षी गठबंधन इंडिया में हिस्सा लेने पहुंचे मल्लिकार्जुन खड़गे से सवाल किया गया कि सरकार स्पेशल सेशन बुला रही है और 'वन नेशन, वन इलेक्शन 'बिल ला सकती है। इस पर उन्होंने कहा, उन्हें लाने दीजिए, लड़ाई जारी रहेगी। इससे पहले टीएमसी चीफ ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेता समय से पहले लोकसभा चुनाव होने की आशंका जता चुके हैं।
देश में लोकसभा और विधानसभा एक साथ कब हुए
देश में 1952, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव हुए हैं। चार बार चुनाव हुए। 1968-1969 के बीच कुछ राज्यों की विधानसभा भंग हो गई, जिससे चेन टूट गई। साल 1971 में भी समय से पहले लोकसभा चुनाव कराए गए थे
एक साथ चुनाव होंगे तो क्या होगा फायदा
देश में अगर लोकसभा चुनाव और सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो इससे खर्चा कम होगा। चुनाव की वजह से प्रशासनिक अधिक लगेगा। भी व्यस्त रहते हैं, उन्हें भी इस काम से निजात मिलेगी और अन्य काम पर फोकस कर सकेंगे। आंकड़े के मुताबिक, जब देश में पहली बार चुनाव हुए थे, उस वक्त तकरीबन 11 करोड़ खर्च हुए थे । 17वीं लोकसभा में 60 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हुए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब लोकसभा चुनाव में इतने पैसे खर्च हुए तो विधानसभा चुनावों में कितने पैसे खर्च होते होंगे।
एक देश, एक चुनाव के पीछे तर्क
लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने को लेकर तर्क दिया जाता है कि इससे पूरे देश में एक पार्टी का वर्चस्व कायम रहेगा, जो अन्य राजनीतिक दलों के खतरनाक सिद्ध होगा। इससे कई दलों पर संकट मंडरा सकता है और एक साथ चुनाव कराए जाने के परिणाम आने में काफी वक्त लगेगा।
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